Last Updated on June 10, 2026 by Gopi Krishna Verma
साड़ी निर्माण प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएं : खुशी शर्मा

गिरिडीह। “स्वावलंबी साड़ी संगम” परियोजना के अंतर्गत आइडिया संस्था द्वारा गोड्डा जिले के प्रसिद्ध रेशम उत्पादन क्षेत्र भगैया में दूसरे एक्सपोज़र विज़िट का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वयं सहायता समूह एवं आजीविका सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं ने रेशम साड़ी निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
आइडिया संस्था की प्रोग्राम डायरेक्टर खुशी शर्मा ने बताया कि इस एक्सपोज़र विज़िट का मुख्य उद्देश्य परियोजना से जुड़ी महिलाओं के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक समझ को विकसित करना तथा उन्हें सफल आजीविका मॉडल से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से आइडिया संस्था द्वारा आजीविका उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत जमुआ प्रखंड के बेरहाबाद पंचायत की 90 महिलाओं को शीघ्र ही साड़ी निर्माण का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

भगैया भ्रमण के दौरान महिलाओं ने रेशम धागे की तैयारी, रंगाई (डाइंग), छपाई (प्रिंटिंग), बुनाई तथा साड़ी निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा और समझा। प्रतिभागियों ने स्थानीय स्तर पर संचालित सफल रेशम उद्योग इकाइयों का अवलोकन करते हुए स्वरोजगार एवं उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
खुशी शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण प्रतिभागियों में आत्मविश्वास का संचार करते हैं तथा उन्हें नए विचारों और तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ-साथ अपने परिवार और समुदाय के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान गणेश पीस फाउंडेशन की प्रियंका कुमारी और गौरव कुमार ने महिलाओं को रेशम साड़ी निर्माण, विपणन एवं स्वरोजगार की संभावनाओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।इस अवसर पर स्वयं सहायता समूह एवं आजीविका सखी मंडल की कई महिलाएं उपस्थित थीं। इनमें मुख्य रूप से नीलम देवी, हसीना खातून, सोनी कुमारी, प्रमिला देवी, सरिता देवी, कुसुम देवी, मीना देवी, अनिता देवी, यशोदा देवी एवं चंपा देवी, हेमंती देवी सहित अन्य प्रतिभागी शामिल थीं।

आइडिया संस्था ने भविष्य में भी महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास एवं समुदाय आधारित आजीविका संवर्धन के लिए ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई। “महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त करने के प्रति उत्साह व्यक्त किया तथा भविष्य में स्वयं का साड़ी निर्माण उद्यम स्थापित करने की इच्छा जताई।”




