Last Updated on September 21, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। लोकतंत्र में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा, शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जनसुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर ‘सिविल सोसाइटी गिरिडीह’ लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में संस्था ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को और अधिक सशक्त बनाने तथा लंबे समय से लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए एक बड़ी पहल की है।
मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए मुख्य न्यायाधीशों को पत्र
सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने झारखंड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति और द्वितीय अपीलों के शीघ्र निष्पादन के लिए झारखंड उच्च न्यायालय तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र भेजकर हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
सोसायटी का मानना है कि RTI आम नागरिकों को शासन से सवाल पूछने का एक बेहद मजबूत माध्यम प्रदान करता है, इसलिए आयोग का प्रभावी ढंग से काम करना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अविलंब कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

पुलिस थानों में आवेदनों की रिसीविंग और पारदर्शिता की मांग
नागरिकों की पुलिस से संबंधित शिकायतों के पारदर्शी निवारण के लिए सिविल सोसाइटी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजा है। इसमें मांग की गई है कि राज्य के सभी थानों में नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले आवेदनों का विधिवत रजिस्टर में संधारण (एंट्री) हो और आवेदकों को आवेदन की लिखित पावती (रिसीविंग) दी जाए। इससे पुलिस कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी।
स्थानीय जनसमस्याओं पर भी सक्रियता
केवल संस्थागत सुधार ही नहीं, बल्कि गिरिडीह शहर और आसपास की दैनिक समस्याओं जैसे खराब सड़कें, शुद्ध पेयजल आपूर्ति, यातायात व्यवस्था और साफ-सफाई जैसे मुद्दों को भी सोसायटी प्रमुखता से उठा रही है।
लोकतंत्र में सजग नागरिक की भूमिका अहम
मामले पर बयान जारी करते हुए सिविल सोसाइटी गिरिडीह के महासचिव शंकर पाण्डेय ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों का जागरूक होना और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित और मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए संस्था का यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।




