बकरी पालन से बदलेगी गिरिडीह के ग्रामीण परिवारों की तकदीर! राज्य में जिले को मिला सबसे बड़ा लक्ष्य
Last Updated on November 6, 2026 by Gopi Krishna Verma
961 परिवारों के लिए खुला स्वरोजगार का रास्ता, सरकार देगी 90% तक सब्सिडी; मार्च 2027 तक आवेदन का मौका

गिरिडीह। खेती के साथ पशुपालन को आय का मजबूत जरिया बनाने की दिशा में गिरिडीह जिले के लिए बड़ी संभावना सामने आई है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए गिरिडीह को झारखंड के सभी 24 जिलों में सबसे अधिक लक्ष्य दिया गया है। जिले में 961 बकरी पालन इकाइयां स्थापित करने की योजना है। यह पहल उन ग्रामीण परिवारों के लिए खास मायने रखती है, जो सीमित संसाधनों के बीच रोजगार और आमदनी के नए विकल्प तलाश रहे हैं।

सिर्फ पशुपालन नहीं, आत्मनिर्भरता की पहल
योजना के तहत 356 लाभुकों को 90 प्रतिशत और 605 लाभुकों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। प्रति इकाई अनुमानित लागत 49,600 रुपये निर्धारित है। 90 प्रतिशत अनुदान श्रेणी में 44,640 रुपये और 75 प्रतिशत श्रेणी में 37,200 रुपये की सहायता का प्रावधान है।
लाभुकों को ब्लैक बंगाल नस्ल की आठ बकरियां और एक बकरा उपलब्ध कराया जाएगा। पशुओं के बीमा, दवा, कृमिनाशक और मिनरल मिक्सचर का खर्च भी योजना में शामिल है। इससे बकरी पालन शुरू करने के लिए लाभुकों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होगा।

महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए विशेष अवसर
योजना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, विधवा महिलाओं और दिव्यांगों सहित पात्र लाभुकों को प्राथमिकता दी जाएगी। झारखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। बकरी पालन के जरिए ग्रामीण परिवार खेती पर निर्भरता कम कर अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित कर सकते हैं।
मार्च 2027 तक आवेदन, कार्यालय से मिलेगी जानकारी
इच्छुक लाभुक मार्च 2027 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए जिला पशुपालन कार्यालय अथवा संबंधित प्रखंड पशुपालन कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

गिरिडीह को मिला 961 इकाइयों का लक्ष्य जिले में पशुपालन आधारित रोजगार की संभावनाओं को दर्शाता है। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र लाभुकों तक समय पर अनुदान और पशु पहुंचते हैं या नहीं, तथा उन्हें पशुपालन के लिए जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन कितना मिलता है।

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