डिजिटल झारखंड की हकीकत: RTI ऑनलाइन पोर्टल पर 37 लाख खर्च, फिर भी सूचना मिलने में लग गए 8 माह

Last Updated on February 20, 2026 by Gopi Krishna Verma गिरिडीह के आरटीआई कार्यकर्ता सुरेन्द्र पांडेय के आवेदन से हुआ खुलासा गिरिडीह। झारखंड सरकार डिजिटल पारदर्शिता और सुशासन के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। सूचना का अधिकार (RTI) ऑनलाइन पोर्टल को स्थापित करने एवं सुचारू रूप से…

Last Updated on February 20, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह के आरटीआई कार्यकर्ता सुरेन्द्र पांडेय के आवेदन से हुआ खुलासा

गिरिडीह। झारखंड सरकार डिजिटल पारदर्शिता और सुशासन के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। सूचना का अधिकार (RTI) ऑनलाइन पोर्टल को स्थापित करने एवं सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार द्वारा लगभग ₹37 लाख खर्च किए जाने का खुलासा पूर्व में एक आरटीआई आवेदन से हुआ था। इसके बावजूद उसी पोर्टल के माध्यम से दायर एक अन्य आरटीआई आवेदन में सूचना प्राप्त करने में लगभग 8 महीने का समय लग जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

आवेदक द्वारा दिनांक 01 जून 2025 को ऑनलाइन RTI पोर्टल के माध्यम से कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग, झारखंड को आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख, सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे की प्रति, फाइल नोटिंग एवं विभागीय पत्राचार की मांग की गई थी। आश्चर्यजनक रूप से आवेदन का उत्तर लगभग 8 माह बाद दिया गया, वह भी अधूरी सूचना के रूप में।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार धारा 7(1) के तहत 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। धारा 2(f) एवं 2(j) के तहत नागरिक को अभिलेखों, दस्तावेजों एवं फाइल नोटिंग की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने का अधिकार है। इन कानूनी प्रावधानों के बावजूद निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन तथा अधूरी सूचना उपलब्ध कराना अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।

व्यक्तिगत कारणों से आवेदक निर्धारित समय के भीतर प्रथम अपील दायर नहीं कर पाया था, लेकिन यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि डिजिटल पोर्टल की व्यवस्था होने के बावजूद सूचना मिलने में असामान्य देरी हुई। इससे यह सवाल उठता है कि जब सरकार डिजिटल गवर्नेंस पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, तो नागरिकों को समयबद्ध सूचना क्यों नहीं मिल पा रही है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि राज्य के लाखों नागरिकों के सूचना के अधिकार से जुड़ा हुआ है। सरकार को चाहिए कि वह इस प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे तथा भविष्य में ऐसी स्थिति न हो इसके लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।

About Author

About the Author

Pappu Kumar Verma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the editor

Gopi Krishna verma

Gopikrishna Verma serves as the Editor of the ‘Dahad India’ news portal. Furthermore, he possesses over fifteen years of experience in the field of journalism. In addition to his work with this news portal, he currently serves as a correspondent for the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. He began his career in journalism with the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. His writing on serious subjects—such as public issues, law, education, and the environment—is remarkable, unique, and inspiring. His dedication to the field of education is such that he himself serves as the Director and Science Mentor at an educational institution, the ‘Adarsh Institute of Education’.

BlockSpare — News, Magazine and Blog Addons for (Gutenberg) Block Editor

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports