Last Updated on August 6, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। सिविल सोसाइटी गिरिडीह द्वारा दो अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित एवं जनसुरक्षा से जुड़े विषयों पर माननीय राज्यपाल, झारखंड तथा उपायुक्त, गिरिडीह के समक्ष औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। इन दोनों विषयों का सीधा संबंध राज्य में सुशासन, पारदर्शिता, नागरिक अधिकारों तथा जनसुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
पहला विषय गिरिडीह–टुंडी मार्ग (बरवाडीह–डांडीडीह) स्थित जर्जर एवं संकरे ओवरब्रिज से संबंधित है, जो जनसुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर स्थिति में है। इस संबंध में सिविल सोसाइटी गिरिडीह द्वारा पूर्व में दिनांक : 02.05.2025 को उपायुक्त, गिरिडीह को आवेदन दिया गया था, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

इस विषय में प्राप्त आधिकारिक पत्राचार से यह स्पष्ट हुआ है कि पूर्व रेलवे, आसनसोल मंडल द्वारा उक्त ओवरब्रिज को कोलयरी साइडिंग के अधीन बताया गया है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसे झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग के अधीन बताया गया है। इस प्रकार विभिन्न विभागों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण न होने के कारण यह महत्वपूर्ण संरचना उपेक्षित स्थिति में बनी हुई है।
यह ओवरब्रिज गिरिडीह को गोविंदपुर जीटी रोड तथा धनबाद एवं पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े एवं भारी वाहनों का आवागमन होता है। इसकी वर्तमान जर्जर एवं संकरी स्थिति किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, जिससे जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि वे जनहित एवं जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों एवं कोलयरी प्रबंधन के साथ समन्वय स्थापित कर इस स्थान पर शीघ्र नए डबल लेन ओवरब्रिज के निर्माण हेतु प्रभावी एवं ठोस पहल करें।
दूसरा विषय झारखंड राज्य सूचना आयोग में वर्षों से लंबित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों के त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण तथा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित है। सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक माध्यम है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है।

अत्यंत चिंता का विषय यह है कि वर्ष 2020 से आयोग में नियमित सुनवाई बाधित रहने के कारण लगभग 25,000 से अधिक द्वितीय अपीलें एवं शिकायतें लंबित हो गई हैं, जिससे हजारों नागरिक वर्षों से सूचना एवं न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हाल ही में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति एक सकारात्मक कदम है, किंतु केवल नियुक्तियाँ पर्याप्त नहीं हैं। जब तक लंबित मामलों के निस्तारण हेतु विशेष, प्रभावी एवं समयबद्ध कार्ययोजना लागू नहीं की जाती, तब तक नागरिकों को समय पर सूचना का अधिकार प्राप्त होना संभव नहीं है।
सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस विषय में आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार एवं संबंधित विभागों को निर्देशित करें कि आयोग में लंबित सभी मामलों के निस्तारण हेतु विशेष अभियान चलाया जाए, नियमित सुनवाई सुनिश्चित की जाए, पर्याप्त मानव संसाधन एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं जनसुलभ बनाया जाए।

सिविल सोसाइटी गिरिडीह का मानना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा दोनों ही लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि इन दोनों क्षेत्रों में समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इसका सीधा प्रभाव नागरिकों के अधिकारों, विश्वास एवं सुरक्षा पर पड़ेगा। इसके अलावा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि मंडल ने मौखिक रूप से समाहरणालय के नजदीक सड़क पर बने हुए गॉफ के संबंध में भी उपायुक्त महोदय का ध्यान आकर्षित कराया।
सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने आशा व्यक्त की है कि माननीय राज्यपाल महोदय एवं जिला प्रशासन इन दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे, जिससे राज्य में सुशासन, पारदर्शिता एवं जनसुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि मंडल में निर्मल झुनझुनवाला, सुनील खंडेलवाल, काशी प्रसाद खंडेलवाल, सुधीर अग्रवाल, आलोक छापरिया सहित अन्य लोग उपस्थित थे।




