Last Updated on September 25, 2026 by Gopi Krishna Verma
भेलवाघाटी पंचायत के 32 गांवों में आज तक नहीं बनी सड़क, जिला परिषद सदस्य ने सरकार और प्रशासन की उपेक्षा पर उठाए सवाल

गिरिडीह। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी किस कदर आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, इसकी एक बानगी देवरी प्रखंड में देखने को मिली। भेलवाघाटी पंचायत अंतर्गत ग्राम बरमसिया के लोही टोला में एक 55 वर्षीय बीमार व्यक्ति को परिजनों द्वारा खटिया पर टांगकर मुख्य सड़क तक पहुंचाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला बीते बुधवार का है। बरमसिया गांव के लोही टोला निवासी 55 वर्षीय मुंशी किस्कू अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए। गांव तक पक्की सड़क और सवारी गाड़ी की सुविधा न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों के पास खटिया का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। ग्रामीण मरीज को खटिया पर लादकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचे। इसके बाद उन्हें वाहन में बैठाकर इलाज के लिए सदर अस्पताल गिरिडीह ले जाया गया।

सड़क के अभाव में एंबुलेंस भी नहीं पहुंचती
ग्रामीणों ने गुरुवार को अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि लोही गांव तक जाने वाली सड़क की स्थिति बद से बदतर है। यहां पक्की सड़क न होने के कारण न तो एंबुलेंस गांव के भीतर आ पाती है और न ही अन्य वाहन। इस वजह से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही घोर अनियमितता के कारण आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार आवेदन देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पूरे गांव में निराशा और आक्रोश है।
जिप सदस्य का खुलासा: 32 गांवों में नहीं है पहुंच पथ
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला परिषद सदस्य उस्मान अंसारी ने बताया कि स्थिति केवल लोही टोला की ही नहीं, बल्कि भेलवाघाटी पंचायत समेत आसपास के कुल 32 गांवों में पहुंच पथ (सड़क) की सुविधा नहीं है।
उन्होंने बताया, “जनजातीय बाहुल्य इन इलाकों में सड़क निर्माण को लेकर गिरिडीह उपायुक्त (DC) से लेकर झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग मंत्री तक को लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई गई है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और प्रशासन द्वारा आज तक कोई पहल नहीं की गई। नतीजा यह है कि आज भी बीमार वृद्धों और महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया ही एकमात्र सहारा बनी हुई है।”
क्षेत्रीय लोगों ने जल्द-से-जल्द सड़क निर्माण की मांग की है ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज में देरी के कारण जान न गंवानी पड़े।




