Last Updated on September 15, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। झारखंड में सूचना के अधिकार (RTI) को प्रभावी बनाने और राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए सिविल सोसाइटी, गिरिडीह ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है। लगभग छह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 1 जुलाई 2026 को आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति और शपथ ग्रहण तो हुई, लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) का पद रिक्त होने के कारण द्वितीय अपीलों और शिकायतों की नियमित सुनवाई अब भी ठप पड़ी है।
इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के लिए सिविल सोसाइटी, गिरिडीह ने 15 सितंबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखित अभ्यावेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रमुख बिंदु और नागरिक संस्था के सवाल
- नियुक्ति के बाद भी सुनवाई नहीं: श्री अनुज कुमार सिन्हा, श्री तनुज खत्री, श्री अमूल्य नीरज खलखो और श्री शिवपूजन पाठक ने 1 जुलाई को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। हालांकि, मुख्य सूचना आयुक्त न होने से हजारों फाइलें धूल खा रही हैं।
- पूर्व उदाहरण का दिया हवाला: अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में ऐसी स्थिति बनने पर तत्कालीन सूचना आयुक्त श्री हिमांशु शेखर चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त का प्रभार दिया गया था। संस्था ने सवाल उठाया कि वर्तमान में वैसा ही वैधानिक या प्रशासनिक विकल्प क्यों नहीं अपनाया जा रहा?
- सरकार और प्रशासन से 7 सीधे प्रश्न:
- चार आयुक्तों की नियुक्ति के बावजूद नियमित सुनवाई क्यों शुरू नहीं हुई?
- मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया किस स्तर पर अटकी है?
- आयोग में लंबित मामलों की कुल वास्तविक संख्या कितनी है?
- लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध रोडमैप क्या है?
- मामलों के दबाव को देखते हुए विशेष पीठ या ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था क्यों नहीं हो रही?
- सुनवाई शुरू होने की कोई निश्चित समय-सीमा तय होगी या नहीं?
- कानून पर भरोसा करने वाले आम नागरिकों की क्या गलती है?
अदालत से की गई मुख्य मांगें
| क्र.सं. | न्यायालय से हस्तक्षेप की प्रमुख मांगें |
|---|---|
| 1 | राज्य सरकार से सूचना आयोग की वर्तमान स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट तलब की जाए। |
| 2 | मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए। |
| 3 | नियमित CIC की नियुक्ति होने तक कार्यवाहक व्यवस्था बनाकर तत्काल सुनवाई शुरू कराई जाए। |
| 4 | वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे हेतु विशेष सुनवाई, अतिरिक्त पीठ और ऑनलाइन व्यवस्था लागू हो। |
“RTI महज कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ नागरिकों का हथियार है। आयोग सिर्फ आयुक्तों की नियुक्ति से नहीं, बल्कि अपीलों की सुनवाई से कार्यशील सिद्ध होगा।” — सिविल सोसाइटी, गिरिडीह
सिविल सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय और झारखंड उच्च न्यायालय के रुख पर टिकी हैं।




