Last Updated on September 27, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। गिरिडीह कॉलेज में पिछले कई दिनों से चल रहा गतिरोध शनिवार को उस समय एक नए मोड़ पर पहुँचा, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के बैनर तले जारी भूख हड़ताल 9वें दिन समाप्त हो गई। हालाँकि, अभाविप ने स्पष्ट किया है कि यह केवल भूख हड़ताल का समापन है; कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका मुख्य आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती।
जूस पिलाकर तुड़वाया अनशन
शनिवार को कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. के.एन. शर्मा एवं वरिष्ठ सेवा प्रमुख पी.एन. सिन्हा ने अनशनकारी छात्र नेताओं—अनीश रॉय और नीरज चौधरी—को जूस पिलाकर व मिठाई खिलाकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि छात्रों की मांगों पर सकारात्मक दिशा में पहल होने के बाद यह अनशन खत्म कराया गया है।
12 दिनों से जारी था आंदोलन
उल्लेखनीय है कि गिरिडीह कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं व भ्रष्टाचार की जांच तथा तत्कालीन प्राचार्य और बर्सर को पद से हटाने की मांग को लेकर करीब 12 दिन पहले अभाविप ने अपना प्रदर्शन शुरू किया था। मांगें पूरी न होने पर छात्र नेता अनीश रॉय और नीरज चौधरी 9 दिन पूर्व अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।

कुलपति ने मांगा था 14 दिनों का समय
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) के कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा खुद गिरिडीह कॉलेज पहुंचे थे और छात्रों के साथ वार्ता की थी। छात्रों के अनुसार, कुलपति ने व्यवस्था में बदलाव और तत्कालीन प्राचार्य को हटाने के लिए 1 दिन तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 14 दिनों का समय मांगा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक दो बार विश्वविद्यालय स्तर की जांच टीम भी कॉलेज का दौरा कर चुकी है।
“आंदोलन खत्म नहीं, सिर्फ भूख हड़ताल रुकी”
भूख हड़ताल खत्म होने के बाद अभाविप नेता मंटू मुर्मू ने हुंकार भरते हुए कहा कि भूख हड़ताल भले समाप्त हो गई हो, लेकिन धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”
आगे क्या
फिलहाल कॉलेज में प्रशासनिक व वित्तीय गड़बड़ियों की जांच प्रक्रिया जारी है। विश्वविद्यालय जांच समिति की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है, उसी पर गिरिडीह कॉलेज के इस पूरे विवाद की भावी दिशा निर्भर करेगी।




