आरटीआई में न्यूनतम शुल्क व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण मांग, ₹ 20 से कम सूचना निःशुल्क देने की हो पहल

Last Updated on April 13, 2026 by Gopi Krishna Verma सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT)भारत सरकार, नई दिल्ली को भेजा पत्र गिरिडीह। सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल के द्वारा एक महत्वपूर्ण…

Last Updated on April 13, 2026 by Gopi Krishna Verma

सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT)भारत सरकार, नई दिल्ली को भेजा पत्र

गिरिडीह। सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल के द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), भारत सरकार के सचिव को एक विस्तृत पत्र भेजकर यह मांग की गई है कि ₹ 20 से कम शुल्क वाली सूचनाओं को निःशुल्क उपलब्ध कराने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए।

प्रेस को जारी जानकारी में बताया गया है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत सूचना की प्रमाणित प्रति हेतु ₹ 2 प्रति पृष्ठ शुल्क निर्धारित है। किन्तु व्यवहारिक स्तर पर यह व्यवस्था अत्यंत अव्यावहारिक सिद्ध हो रही है। कई मामलों में कुल शुल्क ₹2, ₹4 या ₹10 तक सीमित होता है, लेकिन इस छोटी राशि के भुगतान के लिए आवेदक को ₹10 का पोस्टल ऑर्डर खरीदना पड़ता है, साथ ही ₹50–₹60 तक डाक खर्च भी वहन करना पड़ता है।

इस प्रकार मात्र ₹2 या ₹4 की सूचना प्राप्त करने के लिए नागरिकों को ₹60–₹70 तक खर्च करना पड़ता है, जो न केवल आर्थिक रूप से अनुचित है बल्कि सूचना के अधिकार की भावना के भी विपरीत है। इसके अतिरिक्त, जन सूचना पदाधिकारियों (PIO) को भी इतनी अल्प राशि की वसूली एवं लेखांकन में अनावश्यक समय एवं संसाधन खर्च करने पड़ते हैं, जिससे सरकारी तंत्र पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि ₹20 से कम राशि की सूचनाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, तो इससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। सरकारी राजस्व की अनावश्यक हानि रुकेगी। प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। सूचना के अधिकार का उद्देश्य पारदर्शिता एवं सुलभता और अधिक सशक्त होगा। इस पहल को जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए केंद्र सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा की गई है। जनप्रतिनिधियों एवं जागरूक नागरिकों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था लागू होने से सूचना का अधिकार अधिनियम और अधिक जनोन्मुखी एवं व्यवहारिक बनेगा।

पत्र को अग्रतर कार्रवाई हेतु Management Unit of RTI, NIC, New Delhi के पास अग्रसारित कर दिया गया है। व्यापक जनहित में खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि इस अति गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर सरकार के द्वारा जल्द ही आवश्यक कार्रवाई कर ली जाएगी।

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Pappu Kumar Verma

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Gopi Krishna verma

Gopikrishna Verma serves as the Editor of the ‘Dahad India’ news portal. Furthermore, he possesses over fifteen years of experience in the field of journalism. In addition to his work with this news portal, he currently serves as a correspondent for the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. He began his career in journalism with the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. His writing on serious subjects—such as public issues, law, education, and the environment—is remarkable, unique, and inspiring. His dedication to the field of education is such that he himself serves as the Director and Science Mentor at an educational institution, the ‘Adarsh Institute of Education’.

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