Last Updated on August 25, 2026 by Gopi Krishna Verma
कौशल से उद्यमिता की ओर बढ़ेंगे जिले के युवा, Gramodyam Portal पर 50 Entrepreneurship Models से स्वरोजगार के अवसरों को मिलेगा विस्तार

गिरिडीह। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में जिला कौशल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कौशल विकास योजना 2026-27 की तैयारियों, जिले में कौशल प्रशिक्षण की वर्तमान स्थिति, स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता, रोजगार की संभावनाओं तथा प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की रणनीति पर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी, जिला कौशल विकास पदाधिकारी प्रवीण कुमार, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष, जिले की प्रमुख कंपनियों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि, कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के प्रशिक्षण प्रदाता तथा राज्य स्तर से UNDP की टीम के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
स्थानीय आवश्यकता और उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार होगी जिला कौशल विकास योजना
बैठक में जिले में उपलब्ध मानव संसाधन, विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं, स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता तथा वर्तमान में संचालित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। संबंधित विभागों एवं हितधारकों से आवश्यक सूचनाओं एवं आंकड़ों का संकलन एवं समेकन करते हुए जिला कौशल विकास योजना 2026-27 को स्थानीय जरूरतों एवं बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने पर बल दिया गया।

उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के स्थायी अवसरों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों एवं स्थानीय उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि जिले में जिन ट्रेडों एवं कौशल की वास्तविक मांग है, उन्हें प्राथमिकता देते हुए प्रशिक्षण की कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न कंपनियों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों की मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं का आकलन कर प्रशिक्षित युवाओं के लिए प्रभावी प्लेसमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रशिक्षण के बाद युवाओं की रोजगार स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
रोजगार के साथ स्वरोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
बैठक में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ऐसे युवाओं की पहचान करने पर बल दिया गया, जो प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्वयं का उद्यम स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण, वित्तीय सहायता एवं उद्यमिता संबंधी सुविधाओं से युवाओं को जोड़ने तथा संबंधित विभागों एवं वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि जिले में कौशल विकास को ‘प्रशिक्षण से रोजगार’ और ‘कौशल से उद्यमिता’ की व्यापक अवधारणा से जोड़ते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में Gramodyam Portal की उपयोगिता पर चर्चा
बैठक में ग्रामीण युवाओं एवं संभावित उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए NABARD के सहयोग से विकसित Gramodyam Portal की जानकारी भी साझा की गई। Gramodyam एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से इच्छुक प्रतिभागी अपनी रुचि के क्षेत्र में उपलब्ध प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर Business Ideas, Industrial Courses, Bankable Project Reports, Government Schemes, Expert Workshops, Mentoring & Incubation तथा Bank-Linkage Support जैसी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
Gramodyam Portal पर 50 प्रमुख Entrepreneurship Models
बैठक में साझा की गई सामग्री के अनुसार Gramodyam Portal: gramodyam.org.in पर ग्रामीण स्तर पर उद्यम स्थापित करने के लिए 50 Entrepreneurship Models उपलब्ध हैं। इनमें खाद्य प्रसंस्करण, कृषि एवं डेयरी, अनाज मिलिंग, ग्रीन एनर्जी एवं सर्कुलर इकोनॉमी, घरेलू उत्पाद, वेलनेस एवं टेक्सटाइल तथा सर्विस एवं रिपेयर जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्नैक्स प्रोसेसिंग, नूडल मेकिंग, नमकीन निर्माण, टोमैटो कैचअप एवं सॉस, होम/माइक्रो बेकरी, जैम-जेली एवं फ्रूट प्रिजर्व, फ्रूट एवं वेजिटेबल कैनिंग, फ्रूट जूस एवं स्क्वैश, काजू प्रोसेसिंग, मसाला ग्राइंडिंग एवं ब्लेंडिंग, अचार एवं चटनी निर्माण तथा मिलेट कुकीज एवं बेकरी उत्पाद जैसे उद्यम शामिल हैं। अनाज मिलिंग के अंतर्गत गेहूं मिलिंग/आटा चक्की, मिनी राइस मिल तथा मल्टीग्रेन फ्लोर यूनिट जैसे मॉडल उपलब्ध हैं।
कृषि एवं डेयरी क्षेत्र में मिल्क प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग, दही-लस्सी एवं फर्मेंटेड मिल्क उत्पाद, पनीर प्रोसेसिंग, चीज माइक्रो यूनिट, मशरूम प्रोसेसिंग एवं पैकिंग तथा हाइड्रोपोनिक्स सेटअप एवं मेंटेनेंस सर्विस शामिल हैं। ग्रीन एनर्जी एवं सर्कुलर इकोनॉमी के तहत बायोगैस/बायो-CNG लिंक्ड माइक्रो प्लांट, बायोमास ब्रिकेट्स एवं पेलेट्स, बायोडिग्रेडेबल एवं कंपोस्टेबल बैग, टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइक्लिंग, प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन एवं रीसाइक्लिंग, सोलर पैनल असेंबली, सोलर वाटर हीटर असेंबली तथा सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन जैसे मॉडल शामिल हैं।


वहीं हाउसहोल्ड, वेलनेस एवं टेक्सटाइल क्षेत्र में हैंड सैनिटाइजर, फेस मास्क, प्लास्टिक बोतल एवं बैरल, प्लास्टिक मोल्डेड टॉय, परफ्यूम/इत्र, अगरबत्ती एवं धूप, लिक्विड डिशवॉश एवं हैंडवॉश, हर्बल कॉस्मेटिक्स/फेस पैक, होम-बेस्ड ब्यूटी सैलून तथा योगा, फिटनेस एवं लाइफस्टाइल स्टूडियो जैसे उद्यमों की संभावनाएं बताई गईं। सर्विस एवं रिपेयर क्षेत्र में ड्राई क्लीनिंग एवं लॉन्ड्री, कार वॉशिंग एवं डिटेलिंग, डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी, एसी/फ्रिज एवं उपकरण मरम्मत, टू-व्हीलर रिपेयर वर्कशॉप, ऑटो डायग्नोस्टिक्स एवं कार रिपेयर तथा टायर पंचर, व्हील अलाइनमेंट एवं बैलेंसिंग सेंटर जैसे स्वरोजगार मॉडल शामिल हैं।
कौशल से रोजगार और उद्यमिता तक प्रभावी तंत्र विकसित करने पर जोर
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जिला कौशल विकास योजना 2026-27 को केवल प्रशिक्षण केंद्रित न रखते हुए इसे रोजगार की वास्तविक मांग, स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता, युवाओं की रुचि एवं जिले में उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप तैयार किया जाए।
जिला प्रशासन द्वारा कौशल प्रशिक्षण → रोजगार/प्लेसमेंट तथा कौशल प्रशिक्षण → उद्यमिता → बैंक ऋण → स्वरोजगार की समग्र व्यवस्था विकसित करने की दिशा में समन्वित प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इससे जिले के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित करने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।




