Last Updated on October 1, 2026 by Gopi Krishna Verma
पारंपरिक कारीगरों को मिला डिजिटल प्लेटफॉर्म का मंत्र; उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और ई-कॉमर्स से व्यवसाय विस्तार की दी गई जानकारी

गिरिडीह। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की शाखा एमएसएमई-विकास कार्यालय, धनबाद द्वारा गिरिडीह समाहरणालय सभागार में ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ के लाभार्थियों के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों व शिल्पकारों को उनके उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग और आधुनिक मार्केटिंग तकनीकों के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त श्री रामनिवास यादव, उप विकास आयुक्त श्रीमती स्मृता कुमारी और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती अंजना भारती द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस कार्यशाला में योजना के तहत शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े 120 से अधिक कारीगरों और शिल्पकारों ने हिस्सा लिया।
डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स पर विशेषज्ञों का जोर
तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने कारीगरों को आधुनिक व्यापार के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी सही कीमत तय करना, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग बहुत आवश्यक है। इसके अलावा, प्रतिभागियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बिक्री करने और डिजिटल मार्केटिंग के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई, जिससे वे अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा सकें।
कार्यशाला के दौरान योजना के तहत मिलने वाली ऋण सुविधा, उद्यम पंजीकरण, आवेदन प्रक्रिया और झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सहायता योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ना प्राथमिक लक्ष्य: उपायुक्त
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री रामनिवास यादव ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आर्थिक अवसरों में बदलने का एक मजबूत माध्यम है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
उन्होंने लाभार्थियों से आह्वान किया कि वे ब्रांडिंग के आधुनिक तरीकों और डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा, “जब पारंपरिक हुनर आधुनिक बाजार की जरूरतों से जुड़ेगा, तो स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर और मजबूत होंगे।”
सवालों के दिए गए जवाब, आभार के साथ समापन
सत्र के अंत में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कारीगरों की शंकाओं व प्रश्नों का समाधान किया। कार्यक्रम का समापन जमुआ के ब्लॉक ऑफिसर श्री सुभाष कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। एमएसएमई-विकास कार्यालय, धनबाद के अधिकारियों व कर्मियों ने इस सफल आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई।




