Last Updated on September 25, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। कबरीबाद कोयला क्षेत्र के पुनर्पयोग, स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं और दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय विकास को लेकर नगर भवन गिरिडीह में एक महत्वपूर्ण हितधारक बैठक आयोजित की गई। जिला प्रशासन, गिरिडीह द्वारा जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC), आईआईटी कानपुर के सहयोग से आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त रामनिवास यादव ने की।
बैठक में खान बंदी सलाहकार समिति के सदस्यों, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के अधिकारियों, आईआईटी कानपुर/JTRC के प्रतिनिधियों और प्रभावित पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
उपायुक्त रामनिवास यादव ने अपने संबोधन में कहा कि कबरीबाद क्षेत्र के भविष्य की किसी भी योजना में स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं, आजीविका के अवसरों और दीर्घकालिक प्रभावों का ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के आर्थिक विकास की रूपरेखा तैयार करने में आईआईटी कानपुर का सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
आईआईटी कानपुर के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष व जेटीआरसी के संस्थापक प्रो. प्रदीप स्वर्णकार ने जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा और बैठक के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। वहीं, सीसीएल गिरिडीह के महाप्रबंधक (खनन) श्री कनैया शंकर गोपाल ने कबरीबाद खदान के इतिहास और भावी योजनाओं की जानकारी दी। सीसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक (खनन) श्री आनंद प्रकाश ने भी पुनर्पयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किए।
चर्चा के दौरान महिलाओं और युवाओं के लिए वैकल्पिक आजीविका पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, डेयरी, मुर्गी पालन, जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और तकनीकी कौशल विकास जैसे व्यावहारिक विकल्पों पर सुझाव आए।
बैठक में प्राप्त इन सभी सुझावों को साक्ष्य-आधारित पुनर्पयोग योजना तैयार करने के लिए मुख्य इनपुट माना जाएगा। आगे इन विचारों को खान बंदी सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाएगा ताकि क्षेत्र के सतत विकास के लिए एक मजबूत कार्ययोजना बनाई जा सके।




