Last Updated on June 10, 2026 by Gopi Krishna Verma
जिला पंचायती राज विभाग में प्रशिक्षण के नाम पर लुट, आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश मिश्र ने की कार्रवाई की मांग

गिरिडीह। जिला पंचायती राज विभाग में प्रशिक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और खानापूर्ति का गंभीर मामला गरमाता जा रहा है।
राष्ट्रीय आरटीआई मंच के सक्रिय कार्यकर्ता (RTI Activist) राकेश मिश्र ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO) और उप विकास आयुक्त (DDC) गिरिडीह को एक शिकायती पत्र सौंपकर विभाग के DPM-DPRC गुलजार मोहम्मद खान पर पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोपी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान गिरिडीह जिले के विभिन्न प्रखंडों में जनप्रतिनिधियों और सहभागियों के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था।
आरोप है कि इस प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे DPM-DPRC गुलजार मोहम्मद खान ने पूरे कार्यक्रम को महज एक ‘खानापूर्ति’ में तब्दील कर दिया। प्रशिक्षण की गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि कई प्रखंडों में इसका भारी विरोध हुआ और सहभागियों ने इसका पूर्ण बहिष्कार कर दिया था। मामला बढ़ता देख जिला प्रशासन को बीच में ही इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था।₹29,000 के बैंक ट्रांसफर ने खोली ‘मिलीभगत’ की पोलशिकायतकर्ता राकेश मिश्र ने पत्र में सीधे तौर पर वित्तीय हेराफेरी के साक्ष्य होने का दावा किया है।
नियमों के मुताबिक, प्रशिक्षण देने वाले सरकारी प्रशिक्षकों (DPRC-BPRC) को प्रतिदिन के हिसाब से मात्र ₹300 मानदेय देने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि संबंधित वेंडर/कंपनी द्वारा सीधे DPM-DPRC गुलजार मोहम्मद खान के व्यक्तिगत बैंक खाते में ₹29,000 की मोटी रकम ट्रांसफर की गई। आरटीआई एक्टिविस्ट का आरोप है कि यह राशि सीधे तौर पर अधिकारी और निजी कंपनी के बीच के ‘कमीशन खेल’ और मिलीभगत को उजागर करती है।चहेते वेंडर को लाभ और घटिया भोजन का आरोपपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पसंदीदा वेंडर को नियम ताक पर रखकर काम दिया। प्रशिक्षण के दौरान बेहद घटिया स्तर का भोजन और अन्य सामग्रियां परोसी गईं।
अखबारों में इस संबंध में खबरें छपने और स्पष्ट साक्ष्य होने के बावजूद विभाग द्वारा अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिसे लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने विभाग की संलिप्तता पर भी सवाल खड़े किए हैं। त्वरित कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी की मांगआरटीआई कार्यकर्ता राकेश मिश्र ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए।
उन्होंने मांग की है कि आरोपी अधिकारी पर कठोर कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें तत्काल सेवा से विमुक्त किया जाए, ताकि सरकारी महकमे में ईमानदारी और निष्ठा की मिसाल कायम की जा सके। शिकायती पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई हेतु उप विकास आयुक्त (DDC), गिरिडीह को भी भेजी गई है।




