जनता का ब्रह्मास्त्र: मधुपुर रेलवे इंक्वायरी का लैंडलाइन ठप, शिकायत पर रेलवे का आश्वासन, जल्द मिलेगा समर्पित मोबाइल नंबर
Last Updated on May 27, 2026 by Gopi Krishna Verma
वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर आसनसोल ने दी जानकारी, टेंडर प्रक्रिया पूर्ण
सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल का प्रयास लाया रंग

गिरिडीह। मधुपुर रेलवे स्टेशन का इंक्वायरी लैंडलाइन नंबर 06432-224478 महीनों से खराब पड़ा है। यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति, प्लेटफॉर्म, विलंब व रद्दीकरण की सूचना नहीं मिल पा रही है। इस कारण बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

इस गंभीर समस्या को लेकर गिरिडीह के सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने 13 मई, 2026 को रेलवे में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि डिजिटल युग में सिर्फ एक लैंडलाइन पर निर्भर रहना अव्यावहारिक है। तकनीकी खराबी या स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण यात्रियों के पास कोई वैकल्पिक संपर्क नहीं बचता।
क्या है खंडेलवाल की मांग
लैंडलाइन नंबर 06432-224478 को तत्काल ठीक कराया जाए, मधुपुर इंक्वायरी के लिए एक समर्पित मोबाइल नंबर जारी हो, उस मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप सुविधा भी मिले,कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो और नियमित मॉनिटरिंग हो, अद्यतन नंबर स्टेशन व वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाएं।

रेलवे ने दिया सकारात्मक जवाब
इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर, पूर्व रेलवे, आसनसोल ने 15 मई, 2026 को पत्र जारी किया। पत्र क्रमांक SG-46/CPGRAMS/S&T के अनुसार, “मधुपुर रेलवे इंक्वायरी के लिए एक समर्पित मोबाइल नंबर शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया हाल ही में पूरी कर ली गई है।”
यात्रियों को मिलेगी राहत
रेलवे के इस आश्वासन से हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। लैंडलाइन के बार-बार खराब होने से यात्री 139 पर कॉल करने को मजबूर थे, जहां लोकल स्टेशन की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी। मोबाइल नंबर जारी होने से अब सीधे मधुपुर स्टेशन से संपर्क संभव होगा।

सुनील खंडेलवाल ने कहा, “रेलवे इंक्वायरी सेवा यात्रियों की सबसे बुनियादी जरूरत है। रेलवे ने शिकायत पर संज्ञान लिया, यह स्वागत योग्य है। हम मांग करते हैं कि मोबाइल नंबर जल्द सार्वजनिक हो और उस पर 24×7 सेवा सुनिश्चित की जाए।”
केस बंद, पर नजर बनी रहेगी
रेलवे के पोर्टल पर 19 मई 2026 को इस शिकायत को ‘केस क्लोज्ड’ दिखाया गया है। यात्रियों और सामाजिक संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि रेलवे अपना वादा कितने दिन में पूरा करता है।
