मनरेगा कार्यों में तेजी लाने के लिए सख्त कदम: हड़ताल पर गए कर्मियों को एक सप्ताह में लौटने का निर्देश, अन्यथा होगी कार्रवाई

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Last Updated on May 30, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी रामनिवास यादव द्वारा महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश में मनरेगा कर्मियों से एक सप्ताह के भीतर अपने कार्यस्थल पर लौटने का निर्देश दिया गया है।

ज्ञात हो कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत कुछ मनरेगा कर्मी मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिसके कारण मनरेगा योजना के तहत संचालित विकास कार्यों एवं ग्रामीण मजदूरों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में कर्मियों की अनुपस्थिति से योजना के संचालन और लक्ष्यों की प्राप्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जारी आदेश में कहा गया है कि मनरेगा कर्मियों की भूमिका योजना के सफल संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी हड़ताल के कारण मार्च, अप्रैल एवं मई 2026 के दौरान निर्धारित मानव दिवस सृजन के लक्ष्यों की प्राप्ति प्रभावित हुई है, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों की गति भी धीमी पड़ी है।

उपायुक्त ने जिले के समग्र विकास, ग्रामीण मजदूरों के हितों की रक्षा तथा रोजगार सृजन कार्यों को गति देने के उद्देश्य से हड़ताल पर गए कर्मियों से अपील की है कि वे जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अविलंब अपने कार्य पर लौटें और योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित कर्मी एक सप्ताह के भीतर कार्यस्थल पर वापस नहीं लौटते हैं, तो झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के संकल्प संख्या-4729 दिनांक 04 जून 2007 के प्रावधानों के तहत उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, ताकि मनरेगा योजनाओं का सुचारू संचालन हो सके तथा ग्रामीण श्रमिकों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

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