इफको द्वारा पचास विक्रेताओं को मिला खाद वितरण का प्रशिक्षण
Last Updated on May 21, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। इफको देवघर द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा बुधवार को गिरिडीह में बिक्री केंद्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में करीब 50 थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया गया ताकि वे किसानों को सही मार्गदर्शन दे सकें और उन्हें समझा सकें कि इन आधुनिक उर्वरकों के उपयोग से कैसे अच्छी फसल और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम में फसलों के लिए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक, नैनो कॉपर के साथ-साथ जैव उर्वरक(नाइट्रोजन-फास्फोरस-पोटेशियम मिश्रण), चूना (कैल्शियम), मैग्नीशियम, सल्फर, बोरोन और जिंक के महत्व को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के शुरुआत में इफको के क्षेत्र अधिकारी ने उपस्थित खुदरा विक्रेताओं को व्यावहारिक तरीकों से समझाया कि वे किसानों को जैव उर्वरकों एवं जैव उपघटक के उपयोग के लिए कैसे प्रेरित करें। नैनो उर्वरकों की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इनके प्रयोग से फसलें लंबे समय तक हरी-भरी रहती हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण बेहतर होता है। कृषि विज्ञान केंद्र, गिरिडीह की वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. सुनीता कांडेयांग ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की बात कही।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। राज्य विपणन प्रबंधक महोदय ने नैनो तकनीक के व्यापक फायदों पर प्रकाश डाला और खुदरा विक्रेताओं की जिम्मेदारी तय की। उन्होंने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक और नैनो कॉपर के विशिष्ट लाभों और उनके सही इस्तेमाल के तरीकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ये नैनो उर्वरक न केवल कम मात्रा में अधिक परिणाम देते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।

राज्य विपणन प्रबंधक ने इसे ‘मृदा स्वास्थ्य’ को बनाए रखने और सुधारने की दिशा में एक बड़ी और जरूरी पहल बताया। उन्होंने सभी उपस्थित थोक और खुदरा उर्वरक विक्रेताओं से पुरजोर आग्रह किया कि वे इस पूरी तकनीकी जानकारी और इसके फायदों को सीधे अंतिम छोर के किसानों तक पहुंचाएं। कार्यक्रम के आयोजन में इफको उर्वरक सहायक, नवीन वर्मा और इफको बिक्री केन्द्र प्रभारी नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही।
