Last Updated on October 2, 2026 by Gopi Krishna Verma
भाजपा गिरिडीह ग्रामीण के जिला कार्यालय मंत्री ने कहा—विस्थापन केवल गरीबों और आदिवासियों के हिस्से क्यों

गिरिडीह। झारखंड में विकास परियोजनाओं के नाम पर हो रहे विस्थापन और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), गिरिडीह ग्रामीण के जिला कार्यालय मंत्री दीपक भारती ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की आवश्यकता से कोई इंकार नहीं कर सकता, लेकिन यह विकास आदिवासी, मूलवासी और दलित परिवारों की संस्कृति, आजीविका तथा पीढ़ियों से जुड़ी जमीन की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
जंगल ही आजीविका और जीवन का आधार
दीपक भारती ने कहा कि झारखंड में जब भी कोई बड़ी परियोजना आती है, तो सबसे पहले उन क्षेत्रों की जमीन पर नजर जाती है जहाँ आदिवासी और मूलवासी परिवार पीढ़ियों से जल, जंगल और जमीन पर आधारित जीवन जीते आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समुदायों के लिए जंगल केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार हैं। महुआ, मशरूम, बेर, वन उपज और पशुओं के चारे के लिए वे पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर हैं।
संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के असली संरक्षक
भाजपा नेता ने इस बात पर जोर दिया कि जंगलों के वास्तविक संरक्षण में इन्हीं स्थानीय समुदायों की सबसे बड़ी भूमिका रही है। पीढ़ियों से प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर रहने वाले ये परिवार न केवल जंगलों की रक्षा करते हैं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भी रखते हैं।

बंजर और गैर-आवासीय भूमि के विकल्पों पर विचार की मांग
दीपक भारती ने सवाल उठाया कि विकास परियोजनाओं के लिए बार-बार गरीब और कमजोर परिवारों को ही क्यों निशाना बनाया जाता है? उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले सरकार को उपलब्ध अन्य सरकारी, बंजर या गैर-आवासीय भूमि की संभावनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तलाशना चाहिए।
महानायकों के संघर्ष की धरती है झारखंड
झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह धरती केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और संघर्ष के लिए जानी जाती है। यह भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे महानायकों की भूमि है, जिन्होंने अपनी जल, जंगल, जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
दीपक भारती ने कहा कि शहरों का विस्तार, रोजगार का सृजन और आधारभूत संरचना का विकास राज्य के हित में है, लेकिन यह सब समावेशी होना चाहिए। सच्चा विकास वही है जिसमें प्रकृति, संस्कृति और जन-अधिकार सुरक्षित रहें और विस्थापन का दंश केवल कमजोर वर्गों को न झेलना पड़े।




