Last Updated on September 28, 2026 by Gopi Krishna Verma
निष्पक्ष अनुसंधान और दोषसिद्धि दर बढ़ाना प्राथमिकता: एसपी | 7 अक्टूबर तक चलेगा कार्यशाला का प्रथम चरण

गिरिडीह। जिले में नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के प्रभावी और सटीक क्रियान्वयन को लेकर गिरिडीह पुलिस ने कमर कस ली है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार सोमवार (28 सितम्बर) को एसपी कार्यालय स्थित सभागार में जिले के अनुसंधानकर्ताओं (आईओ) के लिए एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण सह कार्यशाला के प्रथम चरण का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में पुलिस निरीक्षक (Inspector) से लेकर सहायक अवर निरीक्षक (ASI) स्तर तक के पुलिस पदाधिकारियों ने भाग लिया।
प्रक्रियागत चूक न हो, निष्पक्ष जांच पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित सभी अनुसंधानकर्ताओं को नए कानूनों के प्रावधानों का अक्षरशः अनुपालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग की रीढ़ निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध अनुसंधान (Investigation) पर टिकी है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य किसी भी प्रकार की तकनीकी व प्रक्रियागत चूक से बचते हुए न्यायालय में अपराधियों की दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) को बढ़ाना होना चाहिए।

मास्टर ट्रेनरों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) स्तर के वरीय अधिकारियों और अभियोजन पदाधिकारियों ने ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में अपनी भूमिका निभाई। प्रशिक्षण के दौरान शरीर व संपत्ति के विरुद्ध अपराध, संगठित अपराध और तेजी से बढ़ते साइबर अपराध से जुड़ी नई धाराओं की पुरानी धाराओं से तुलना करते हुए व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी गई।
प्रतिदिन 50 अधिकारी होंगे प्रशिक्षित
जिले के सभी अनुसंधानकर्ताओं को नए कानूनों में निपुण बनाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण अभियान 07 अक्टूबर 2026 तक निरंतर चलाया जाएगा। तय समय-सारणी के अनुसार प्रतिदिन 50 पुलिस अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।




