Last Updated on September 26, 2026 by Gopi Krishna Verma
नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, 1930 हेल्पलाइन को मजबूत करने और फ्रीज की गई धनराशि की त्वरित रिकवरी की मांग

गिरिडीह। देश भर में UPI, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन के प्रसार के साथ-साथ तेजी से बढ़ रहे साइबर व डिजिटल वित्तीय फ्रॉड को लेकर सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण जनहित शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई हेतु इसे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजेश कुमार के पास अग्रसारित कर दिया है।
अपनी शिकायत में सुनील खंडेलवाल ने कहा कि आज डिजिटल भुगतान आम नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में साइबर अपराध केवल एक तकनीकी खामी नहीं, बल्कि नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल इंडिया पर उनके विश्वास से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय बन गया है। उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों, गरीबों और कम डिजिटल-साक्षर लोगों की सुरक्षा पर चिंता जताई, जो आसानी से ठगों का शिकार बन रहे हैं।

बैंक-पुलिस समन्वय और रिकवरी की उठाई मांग
शिकायत में इस बात पर जोर दिया गया है कि ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित के लिए बैंक, पुलिस और साइबर सेल के चक्कर काटना और अपनी गाढ़ी कमाई की रिकवरी कराना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए खंडेलवाल ने गृह मंत्रालय के समक्ष निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
- सिंगल विंडो शिकायत प्रणाली: साइबर पीड़ितों के लिए एक एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (Single Window System) विकसित की जाए।
- 1930 हेल्पलाइन को अधिक प्रभावी बनाना: 1930 पर शिकायत मिलते ही बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ तत्काल रियल-टाइम समन्वय स्थापित कर धोखाधड़ी की रकम को फ्रीज किया जाए।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: शिकायतों की रियल-टाइम ट्रैकिंग (Status Tracking) की सुविधा दी जाए और फ्रीज या बरामद हुई धनराशि की समयबद्ध वापसी (Recovery) के लिए स्पष्ट नियम व समय-सीमा तय की जाए।
- जिला स्तरीय सहायता केंद्र: ग्रामीण और कम साक्षर नागरिकों की मदद के लिए जिला स्तर पर साइबर शिकायत सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं।
- एजेंसियों में बेहतर तालमेल: केंद्रीय साइबर एजेंसियों, राज्य पुलिस, बैंकों और यूपीआई सेवा प्रदाताओं के बीच आपसी समन्वय को और मजबूत किया जाए।

खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल इंडिया’ की वास्तविक सफलता केवल लेनदेन की संख्या बढ़ाने में नहीं, बल्कि नागरिकों के धन और उनके डिजिटल विश्वास की सुरक्षा सुनिश्चित करने में है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही नीतिगत स्तर पर प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित कदम उठाएगी, जिससे देश के करोड़ों नागरिकों को साइबर ठगी से सुरक्षा और राहत मिल सकेगी।




