Last Updated on September 1, 2026 by Gopi Krishna Verma
1973 के बाणसागर समझौते से लेकर 2026 के ऐतिहासिक फैसले तक: जानिए दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे की पूरी कहानी

सोन नदी विवाद समझौता। झारखंड और बिहार के बीच पिछले 26 वर्षों से चले आ रहे ऐतिहासिक सोन नदी जल बंटवारे विवाद पर आखिरकार पूर्ण विराम लग गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन और बिहार के मंत्री विजय चौधरी शामिल हुए।

समझौते के मुख्य बिंदु (जल आवंटन)
सोन नदी के कुल जल हिस्से में से दोनों राज्यों के बीच आवंटन का स्पष्ट खाका तैयार किया गया है:
| राज्य | आवंटित जल हिस्सा (MAF) | मुख्य लाभार्थी क्षेत्र |
|---|---|---|
| बिहार | 5.75 MAF | शाहाबाद और मगध प्रमंडल के कृषि क्षेत्र |
| झारखंड | 2.00 MAF | पलामू और गढ़वा जिले के डेढ़ दर्जन प्रखंड |

विवाद का पृष्ठभूमि और इतिहास
- 1973 का बाणसागर समझौता: वर्ष 1973 में हुए समझौते के तहत सोन नदी के कुल 14.25 MAF (मिलियन एकड़ फीट) जल में से तीन राज्यों को पानी आवंटित किया गया था—
- मध्यप्रदेश: 5.25 MAF
- उत्तर प्रदेश: 1.25 MAF
- अविभाजित बिहार: 7.75 MAF
- वर्ष 2000 में झारखंड का गठन: बिहार से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद झारखंड ने अविभाजित बिहार के 7.75 MAF हिस्से में से अपने भौगोलिक अधिकार और आवश्यकताओं के आधार पर हिस्सेदारी की मांग उठाई।
- 26 साल का गतिरोध: पानी के इस हिस्से को लेकर दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। आखिरकार 10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (Eastern Zonal Council) की 27वीं बैठक में गृह मंत्री की मौजूदगी में एक सहमति ढांचा तैयार हुआ, जिसे अब औपचारिक समझौते में बदला गया है।

पलामू और गढ़वा प्रमंडल को सीधा फायदा
- सिंचाई और पेयजल संकट से मुक्ति: झारखंड के सूखा प्रभावित पलामू और गढ़वा जिलों के 18 से अधिक प्रखंडों (डेढ़ दर्जन प्रखंड) को अब सोन नदी का पानी निर्बाध रूप से मिलेगा।
- लिफ्ट सिंचाई योजनाएं सुरक्षित: पलामू प्रमंडल में सोन नदी के पानी को ‘लिफ्ट’ करके सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की जो योजनाएं संचालित या प्रस्तावित थीं, उन पर अब किसी तरह की कानूनी या अंतर-राज्यीय अड़चन नहीं रहेगी।
- कधवन डैम (Kadhavan Dam) परियोजना का रास्ता साफ:
- सोन नदी पर कधवन के पास बांध बनाने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था।
- बिहार सरकार ने इसके आसपास प्रारंभिक सर्वेक्षण किया है।
- बांध का निर्माण होने पर झारखंड इसमें अपने हिस्से का वित्तीय योगदान देकर अतिरिक्त जल का संचयन और उपयोग कर सकेगा।
राजनीतिक व प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
“वर्षों से सोन नदी के जल बंटवारे का मामला लंबित था। लंबे विचार-विमर्श के बाद अब इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। इससे किसानों की जरूरतों और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड)
सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता इंजीनियर आफताब आलम के अनुसार, इस समझौते से पलामू और गढ़वा की कृषि अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा। दोनों राज्यों के बीच यह समझौता अंतर-राज्यीय जल विवादों के शांतिपूर्ण और सकारात्मक समाधान की दिशा में एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।




