Last Updated on July 23, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव ने गुरुवार को अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1995 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय निगरानी एवं अनुश्रवण समिति की बैठक की। बैठक का उद्देश्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समयबद्ध न्याय एवं राहत उपलब्ध कराने तथा संबंधित मामलों की प्रगति की समीक्षा करना था।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप लंबित एवं निष्पादित मामलों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों में त्वरित, निष्पक्ष एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें न्याय दिलाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में जांच, अभियोजन, राहत एवं पुनर्वास से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पीड़ितों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी करने पर विशेष बल दिया।
बैठक में समिति के माननीय सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अपने सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए गए, जिन पर उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि समिति की नियमित समीक्षा से अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, जिला कल्याण पदाधिकारी सहित समिति के सदस्यगण, संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।




