उसरी जलप्रपात को प्रदूषण मुक्त बनाने, औद्योगिक संस्थानों में CAAQMS लगाने एवं अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

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Last Updated on May 21, 2026 by Gopi Krishna Verma

प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिए गए सख्त निर्देश

गिरिडीह। डीसी रामनिवास यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की। बैठक में जिले में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी, अवैध खनन पर रोक तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने को लेकर विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। इस दौरान उपायुक्त ने पूर्व की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य है।”

उपायुक्त ने जिले के प्रमुख चौक-चौराहों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) डिस्प्ले स्क्रीन लगाने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को वायु प्रदूषण की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। साथ ही सभी औद्योगिक संस्थानों में CAAQMS (Continuous Ambient Air Quality Monitoring System) अनिवार्य रूप से स्थापित करने का सख्त निर्देश दिया गया। उन्होंने प्रदूषित वायु की नियमित सैंपलिंग कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का सतत मूल्यांकन किया जा सके। बैठक में उसरी नदी एवं उसरी जलप्रपात को प्रदूषण मुक्त बनाने को लेकर विशेष चर्चा हुई।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि गंदे नालों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए तथा नालों के दूषित जल को फिल्टर एवं ट्रीटमेंट के उपरांत ही नदी में प्रवाहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उसरी जलप्रपात जिले की प्राकृतिक धरोहर है, जिसकी स्वच्छता एवं संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। समीक्षा के दौरान जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग, स्टोन माइंस एवं क्रशर संचालन की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने सीसीएल परियोजनाओं एवं औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास अधिकाधिक वृक्षारोपण कराने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर बल दिया।

इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, होटल एवं रेस्तरां में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि सभी नर्सिंग होम एवं सरकारी अस्पतालों के लिए CTO ऑथेंटिकेशन अनिवार्य है तथा बायोमेडिकल वेस्ट का समयबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट एवं उत्सर्जित कचड़ों के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कचड़ों का अनियंत्रित डंपिंग किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में उपायुक्त ने सभी औद्योगिक संस्थानों में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक, पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, फैक्टरी इंस्पेक्टर, महाप्रबंधक सीसीएल, क्षेत्रीय पदाधिकारी प्रदूषण नियंत्रण, कारखाना निरीक्षक, सभी अंचल अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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