Last Updated on September 6, 2026 by Gopi Krishna Verma
देर रात अचानक तबीयत बिगड़ी, मर्सी अस्पताल में ली अंतिम सांस; दो बार गिरिडीह से विधायक और हेमंत सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी

गिरिडीह/रांची। झारखंड की राजनीति के लिए रविवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता, गिरिडीह के विधायक और झारखंड सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन हो गया। शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह स्थित मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। ताजा रिपोर्टों में उनके निधन की पुष्टि झामुमो की ओर से भी की गई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा-
रिपोर्टों के अनुसार, रात में अचानक सीने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन करीब तड़के उनकी मृत्यु हो गई। निधन से एक दिन पहले यानी 5 सितंबर को भी वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय थे और शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल हुए थे।

56 वर्ष की उम्र में असमय निधन
सुदिव्य कुमार सोनू करीब 56 वर्ष के थे। 2024 के विधानसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार वे 12वीं तक शिक्षित थे और राजनीति के साथ व्यवसाय से भी जुड़े थे।
उनकी राजनीतिक पहचान धीरे-धीरे गिरिडीह की स्थानीय राजनीति से निकलकर राज्य स्तर तक पहुंची। वह झामुमो के उन नेताओं में शामिल हुए जिनकी संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका बनी।
2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे
सुदिव्य कुमार सोनू का चुनावी सफर 2009 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ। उस चुनाव में उन्होंने गिरिडीह सीट से झामुमो के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और 8,272 वोट प्राप्त किए। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सके।
इसके बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर गिरिडीह से चुनाव लड़ा। इस बार उनका प्रदर्शन मजबूत रहा और उन्हें 47,517 वोट मिले, लेकिन भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से 9,933 मतों के अंतर से चुनाव हार गए।
2019 में पहली बड़ी चुनावी जीत
2019 का विधानसभा चुनाव सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने गिरिडीह सीट से झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए 80,871 वोट हासिल किए और भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 15,884 मतों से हराया।
इस जीत के बाद गिरिडीह की राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा और वह झामुमो के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल हो गए।
2024 में दोबारा जीते, इस बार मुकाबला बेहद करीबी रहा
2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने लगातार दूसरी बार गिरिडीह विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। उन्हें 94,042 वोट मिले, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट मिले। उन्होंने 3,838 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इस तरह वह गिरिडीह से लगातार दूसरी बार विधायक बने और विधानसभा में उनकी राजनीतिक भूमिका और मजबूत हुई।

हेमंत सोरेन सरकार में बने मंत्री
2024 के विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनी और सुदिव्य कुमार सोनू को मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास तथा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े रहे।
मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रही। हाल के दिनों में भर्ती परीक्षाओं और अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की ओर से बातचीत करने वाले प्रमुख चेहरों में भी वह शामिल थे। JPSC/JSSC से जुड़े आंदोलनों के दौरान उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों से संवाद किया था।

झामुमो के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह केवल गिरिडीह के विधायक नहीं थे, बल्कि पार्टी के वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं में गिने जाते थे। झामुमो ने उनके निधन को झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
उनकी राजनीतिक शैली की एक बड़ी विशेषता स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधा संवाद और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय संपर्क मानी जाती थी। यही कारण है कि गिरिडीह में उनका राजनीतिक आधार लगातार मजबूत हुआ।
हेमंत सरकार पर क्या होगा असर?
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से राज्य सरकार के सामने तत्काल दो स्तर की चुनौती खड़ी होगी।
पहली चुनौती मंत्रिमंडल से जुड़ी है। उनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग थे। ऐसे में अब इन विभागों का अतिरिक्त प्रभार किसी अन्य मंत्री को दिए जाने अथवा मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
दूसरी चुनौती गिरिडीह विधानसभा सीट को लेकर है। उनके निधन के बाद निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत आगे की संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। परिस्थितियों के अनुसार सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि उपचुनाव की तारीख और प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा ही तय की जाएगी।
झामुमो के सामने नई राजनीतिक चुनौती
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में सुदिव्य कुमार सोनू की लगातार दो जीत ने उन्हें झामुमो का मजबूत चेहरा बनाया था। 2019 में उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 में भी कड़े मुकाबले के बावजूद सीट अपने पास रखी।
अब उनके निधन के बाद इस सीट को बरकरार रखना झामुमो के लिए राजनीतिक चुनौती होगी। पार्टी को न केवल नया प्रत्याशी चुनना होगा, बल्कि सुदिव्य सोनू के व्यक्तिगत जनाधार और संगठनात्मक पकड़ को भी संभालना होगा।
गिरिडीह की राजनीति में छोड़ी बड़ी जगह
सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक सफर को देखें तो 2009 में चुनाव हारने वाले प्रत्याशी से 2019 और 2024 में लगातार दो बार विधायक बनने तक का सफर उल्लेखनीय रहा। 2014 में हार के बाद उन्होंने वापसी की और अगले दो विधानसभा चुनावों में गिरिडीह सीट पर झामुमो का परचम लहराया।
उनके निधन के साथ गिरिडीह की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि झामुमो इस राजनीतिक विरासत को किस तरह आगे बढ़ाता है और गिरिडीह विधानसभा सीट पर किस चेहरे को आगे करता है।

राजनीतिक सफर एक नजर में
- 2009: गिरिडीह से झामुमो प्रत्याशी, 8,272 वोट
- 2014: गिरिडीह से झामुमो प्रत्याशी, 47,517 वोट; चुनाव में पराजय
- 2019: पहली बार गिरिडीह से विधायक निर्वाचित, 15,884 मतों से जीत
- 2024: लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित, 3,838 मतों से जीत
- 2024 के बाद: हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री
- प्रमुख विभाग: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन तथा खेलकूद एवं युवा कार्य
- सितंबर 2026: आकस्मिक निधन
गिरिडीह से रांची तक शोक
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर है। राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।
एक सक्रिय विधायक, वरिष्ठ झामुमो नेता और राज्य सरकार के मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक चले जाना झारखंड की राजनीति के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।




