ऐतिहासिक गिरिडीह स्टेशन की अनदेखी पर बढ़ा जनाक्रोश, पुनर्जीवन की मांग को लेकर सुनील खंडेलवाल ने रेलवे मंत्रालय में दर्ज कराई शिकायत

Last Updated on February 28, 2026 by Gopi Krishna Verma गिरिडीह। शहर की ऐतिहासिक पहचान रहे पुराने रेलवे स्टेशन की लगातार उपेक्षा के विरुद्ध अब जनाक्रोश खुलकर सामने आने लगा है।सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने इस मुद्दे को लेकर रेलवे बोर्ड, भारत सरकार से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसे Ministry of…

Last Updated on February 28, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। शहर की ऐतिहासिक पहचान रहे पुराने रेलवे स्टेशन की लगातार उपेक्षा के विरुद्ध अब जनाक्रोश खुलकर सामने आने लगा है।सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने इस मुद्दे को लेकर रेलवे बोर्ड, भारत सरकार से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसे Ministry of Railways को प्रेषित किया गया है तथा मामले को श्री शिवराम माझी, Deputy General Manager, (G), Eastern Railway मुख्यालय, कोलकाता को अग्रसारित किया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराना गिरिडीह रेलवे स्टेशन शहर के मध्य स्थित एक ऐतिहासिक धरोहर एवं लाखों नागरिकों की जीवनरेखा रहा है, किंतु वर्षों से इसके विकास, आधुनिकीकरण एवं ट्रेन संचालन को उपेक्षित रखा गया है। दूसरी ओर, नया स्टेशन शहर से काफी दूर स्थापित कर दिया गया है, जिससे आमजन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों को न्यू गिरिडीह स्टेशन तक पहुंचने के लिए ₹150 तक ऑटो/टोटो किराया देना पड़ता है, जबकि गिरिडीह से मधुपुर (38 KM) का रेल किराया मात्र ₹10 है। यह स्थिति सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पुराने गिरिडीह स्टेशन का तत्काल सर्वेक्षण कर जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण की कार्ययोजना घोषित की जाए। कोलकाता, पटना सहित प्रमुख शहरों के लिए यात्री ट्रेनों का संचालन पुनः प्रारंभ किया जाए। प्लेटफार्म प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, प्रकाश व्यवस्था एवं सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए। स्थानीय जनता एवं जनप्रतिनिधियों से परामर्श कर पारदर्शी निर्णय लिया जाए।

खंडेलवाल ने कहा कि यह केवल सुविधाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि गिरिडीह की ऐतिहासिक अस्मिता, आर्थिक गतिविधियों और लाखों नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ा प्रश्न है। यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आम जनता लोकतांत्रिक एवं वैधानिक माध्यमों से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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रेलवे प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक एवं निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित करे।व्यापक जनहित में सुनील खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि रेल प्रशासन के द्वारा जल्द ही मामले को संज्ञान में लेकर उचित एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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Pappu Kumar Verma

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