खोरीमहुआ में बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं मिशन शक्ति के अंतर्गत अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला हुआ आयोजन

Last Updated on January 9, 2026 by Gopi Krishna Verma महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण हेतु एक समग्र एवं समेकित योजना है, मिशन शक्ति: उपायुक्त गिरिडीह। समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के उन्मूलन, बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम तथा महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा…

Last Updated on January 9, 2026 by Gopi Krishna Verma

महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण हेतु एक समग्र एवं समेकित योजना है, मिशन शक्ति: उपायुक्त

गिरिडीह। समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के उन्मूलन, बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम तथा महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा संचालित सामाजिक कुरीति निवारण योजना, राज्य योजनाएँ – बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं मिशन शक्ति के अंतर्गत खोरीमहुआ अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।

उक्त कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव एवं जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न अतिथियों द्वारा कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जन जागरूकता बढ़ाना, बाल विवाह उन्मूलन हेतु कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने की बात कही।

इसके अलावा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि बेटी को बेटा बना लो तो इतिहास छू लेगी, जरा सा पंख खोलो तो आकाश छू लेगी। आगे उपायुक्त ने बताया कि हमारे यहां विद्यालयों में 90% उपस्थित बालिकाओं की होती है लड़को से ज्यादा लड़कियां अब पढ़ाई के प्रति अग्रसर हो रही है। मां-बाप का मानना है कि बेटा बुढ़ापे का सहारा होगा पर मैं कहता हूं कि आने वाले समय में लड़कियां ही अपने मां-बाप का सहारा होगी बुढ़ापे की लाठी बनेगी हमें बच्चियों को उतना ही सम्मान देना है जितना हम अन्य लोगों को देते हैं।

वर्तमान समय में समाज में मूल्यो का ह्रास हो रहा है। कहीं ना कहीं हमारा समाज अनैतिकता की ओर जा रहा है जिसका परिणाम है कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों अपनी जड़े जमाई बैठी हुई है। बाल विवाह डायन प्रथा जैसी कुरुति को मिटाना सिर्फ सरकारी तंत्र की जिम्मेवारी नहीं है समाज के हर एक व्यक्ति को इसके लिए आगे आना होगा तभी इनकी जड़े काटी जा सकती है। हम सभी एक मंच पर एक साथ एकजुट हुए है आवश्यकता है हमें अपने समाज से इस प्रकार की बुराइयों को खत्म करने की। सबको एकजुट होकर इससे जड़ से खत्म करने हेतु प्रयास करना होगा तभी हम एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकते हैं। बच्चे देश के भविष्य होते हैं और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। मेरा अनुरोध होगा उन सभी अभिभावकों को से जो अभी भी इस अंधेरे में अपने बच्चों का जीवन बर्बाद कर रहे। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वो इस प्रकार की घटनाओं का विरोध करें और इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह की किसी भी सूचना को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने कहा कि लोगों की जो सोच है कि बेटे ही बुढ़ापे की लाठी है वह बिल्कुल गलत है सिर्फ बेटे ही नहीं बल्कि हमारी बेटियां भी लाठी होती है इसीलिए सिर्फ बेटों को ही नहीं बल्कि बेटे और बेटियां दोनों को ही पढ़ाना है बच्चों का बाल विवाह नहीं होने देना है ना ही करना है।

अनुमंडल पदाधिकारी खोरीमहुआ अनिमेष रंजन ने कहा कि सबसे पहले हमें हमारी सोच बदलना है की बाल विवाह कुरुति है बाल विवाह कुरुति नहीं बल्कि अपराध है। वो अपराध है जो समाज सिर्फ अपनी सोच के कारण कर रहा है बाल विवाह एक गैर जमानती अपराध है जिसे हमें बंद करना होगा। बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि बच्चों की मौलिक अधिकारों शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का निर्मम उल्लंघन है यह हमारे बच्चों के सपनों को समय से पहले कुचल देता है और उनके पूरे जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है।

इसके अलावा डायन प्रथा, बाल विवाह, सावित्री बाई फुले समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना, मानव तस्करी, डायन कुप्रथा उन्नमूलन, मिशन शक्ति, डायन कुप्रथा उन्मूलन, सामुहिक विवाह कार्यक्रम, निःशक्त कल्याणार्थ योजना आदि योजनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी और योजना के लाभ लेने के तरीकों के साथ योजनाओं से जुड़ा संबंधित जागरूकता फिल्म दिखाया गया।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के कानूनी प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। बताया गया कि अधिनियम के अनुसार बालिकाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा बालकों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। निर्धारित आयु से पूर्व संपन्न किसी भी विवाह को बाल विवाह की श्रेणी में रखा गया है, जो कि कानूनन अपराध है। इस क्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि विवाह के लिए आयु सत्यापन केवल विद्यालय पंजीकरण/स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाएगा। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि बाल विवाह कराना, करवाना अथवा उसमें किसी भी प्रकार से सहयोग करना दंडनीय अपराध है, जिसके अंतर्गत दोषी पाए जाने पर कारावास एवं आर्थिक दंड का प्रावधान है।

प्रशिक्षण के दौरान विवाह आयोजन से जुड़े व्यक्तियों जैसे कैटरर, टेंट हाउस, बैंड पार्टी एवं बिचौलियों की भूमिका एवं जिम्मेदारी पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। बताया गया कि यदि किसी बाल विवाह की जानकारी होने के बावजूद वे सेवा प्रदान करते हैं, तो उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध है, जो बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास में बाधा है, तथा उनके सपनों को साकार होने से रोकती है। इसलिए मैं शपथ लेता/लेती हूँ कि मैं बाल विवाह के खिलाफ हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी।सुनिश्चित करूंगा/करूंगी कि मेरे परिवार, पड़ोस और समुदाय में किसी बालिका/बालक का बाल विवाह न होने पाए। मैं ऐसे किसी भी बाल विवाह के प्रयास की सूचना महिला हेल्पलाइन 181, पंचायत और सरकार को दूंगा/दूंगी।मैं बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा के लिए भी अपनी आवाज बुलंद करूंगा/करूंगी और बाल विवाह मुक्त झारखण्ड का निर्माण करूंगा/करूंगी।साथ ही मैं यह भी शपथ लेता/लेती हूँ कि मैं झारखंड को डायन कुप्रथा एवं इस तरह की अन्य सामाजिक कुरीतियों से भी मुक्त करूंगा/करूंगी।

कार्यशाला में उपरोक्त के अलावा अनुमंडल पदाधिकारी, खोरीमहुआ, श्री अनिमेष रंजन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी जमुआ समेत बाल विकास विभाग के प्रतिनिधि, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिकाएं, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका,ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी आदि उपस्थित थे।

About Author

About the Author

Badri kumar Yadav

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the editor

Gopi Krishna verma

Gopikrishna Verma serves as the Editor of the ‘Dahad India’ news portal. Furthermore, he possesses over fifteen years of experience in the field of journalism. In addition to his work with this news portal, he currently serves as a correspondent for the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. He began his career in journalism with the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. His writing on serious subjects—such as public issues, law, education, and the environment—is remarkable, unique, and inspiring. His dedication to the field of education is such that he himself serves as the Director and Science Mentor at an educational institution, the ‘Adarsh Institute of Education’.

BlockSpare — News, Magazine and Blog Addons for (Gutenberg) Block Editor

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed