Last Updated on October 3, 2026 by Gopi Krishna Verma
जमुआ प्रखंड के चुंगलो में बन रहे पैक्स गोदाम का है मामला

एक नज़र:
- रंगदारी मांगने का आरोप: संवेदक ने पैक्स अध्यक्ष पर ₹5 लाख मांगने का लगाया आरोप, विभाग को भेजे 5 पत्र।
- सफाई: पैक्स अध्यक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने की रखी बात।
जमुआ। जमुआ प्रखंड के चुंगलो में किसानों के अनाज भंडारण के लिए सहकारिता विभाग की ओर से बन रहा 500 मीट्रिक टन क्षमता का पैक्स गोदाम पिछले डेढ़ वर्षों से अध्यक्ष और संवेदक के बीच उपजे विवाद के कारण अधर में लटका हुआ है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुआ यह निर्माण कार्य महज दो महीने चलने के बाद लिनटल (लिंटन) स्तर तक पहुंचते-पहुंचते पूरी तरह ठप हो गया।
संवेदक का आरोप: 5 लाख की मांग और कार्य में बाधा
गोदाम का निर्माण करा रही एजेंसी मां सीता एंटरप्राइजेज के कार्यकारी प्रधान सुमित शर्मा ने चुंगलो पैक्स अध्यक्ष भुवनेश्वर मंडल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शर्मा का कहना है:
- रंगदारी की मांग: पैक्स अध्यक्ष द्वारा उनसे ₹5 लाख की मांग की जा रही है। राशि न देने पर अध्यक्ष अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर काम रुकवा देते हैं।
- आर्थिक नुकसान: कार्य बंद रहने से लेबर और मिस्त्री को बैठाकर भुगतान करना पड़ा, जिससे लगभग ₹1.08 लाख का नुकसान हुआ है।
- सामग्री की चोरी: निर्माण स्थल से करीब ₹20,000 मूल्य की एक मशीन भी चोरी हो चुकी है।
- प्रशासनिक शिथिलता: इस संबंध में सहकारिता विभाग के अधिकारियों को 5 बार लिखित आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
संवेदक ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य पूरी तरह निर्धारित प्राक्कलन (Estimate) और गुणवत्ता के अनुरूप ही कराया जा रहा है और वे गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
पैक्स अध्यक्ष का पक्ष: आरोप बेबुनियाद
दूसरी ओर, पैक्स अध्यक्ष भुवनेश्वर मंडल ने संवेदक द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं की है। यदि संवेदक प्राक्कलन के अनुसार मानक और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराता है, तो उन्हें कार्य से कोई आपत्ति नहीं है।
किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
डेढ़ वर्ष से निर्माण बंद रहने के कारण जहां एक ओर सरकारी योजना का उद्देश्य अधूरा पड़ा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों को अनाज भंडारण की सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में विभागीय हस्तक्षेप के बिना इस विवाद का सुलझना और निर्माण कार्य का दोबारा शुरू होना संभव नजर नहीं आ रहा है।




