Last Updated on October 3, 2026 by Gopi Krishna Verma

जमुआ। कभी कैडर आधारित अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भाकपा माले की जमुआ प्रखंड इकाई में इन दिनों गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान चरम पर है। निष्कासन, गुटबाज़ी और इस्तीफों के इस दौर में अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विचारों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगने लगा है। शनिवार को मलीडीह निवासी व भाकपा माले जमुआ प्रखंड कमिटी के सदस्य वीरेंद्र कुमार वर्मा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र जमुआ प्रखंड सचिव को भेजा है, जिसकी एक कॉपी जिला सचिव (गिरिडीह) को भी सौंपी गई है।

30 सितंबर का वह फैसला, जिसने सुलगा दी गुटबाजी की आग
इस पूरे विवाद की जड़ 30 सितंबर को जमुआ पूर्वी लोकल कमिटी द्वारा लिया गया एक बड़ा फैसला है। लोकल कमिटी ने रामकुमार वर्मा को लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी विनोद सिंह के खिलाफ काम करने और लगातार ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल रहने के आरोप में निष्कासित कर दिया था।
लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब ऊपरी कमिटी ने लोकल कमिटी के सदस्यों का पक्ष सुने बिना ही उनके इस फैसले को खारिज कर दिया और पूरी कमिटी को ही भंग कर दिया। ऊपरी संगठन के इस रुख से प्रखंड और लोकल कमिटी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई।
‘कॉमरेड महेंद्र सिंह के सिद्धांतों से भटक गई है कमिटी’
त्यागपत्र में वीरेंद्र कुमार वर्मा ने संगठन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे झारखंड के जननेता कॉमरेड महेंद्र सिंह की क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी से जुड़े थे। लेकिन आज की प्रखंड कमिटी उन सिद्धांतों और लोकतांत्रिक परंपराओं को पूरी तरह दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपना रही है, जिससे वे आहत हैं।
“बिना सदस्यों की बात सुने और निष्कासन के फैसले को दरकिनार कर लोकल कमिटी को भंग करना यह साबित करता है कि पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं के रुख की कोई कद्र नहीं बची है।” — वीरेंद्र कुमार वर्मा
आम सभा लागू होने तक जारी रहेगा विरोध: कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाने की मांग
वीरेंद्र वर्मा ने अपने इस्तीफे के साथ ही पार्टी नेतृत्व के सामने एक शर्त भी रखी है। उनका कहना है कि जब तक संगठन के सभी सदस्यों की आम सभा बुलाकर लोकतांत्रिक तरीके से लिए गए फैसलों को लागू नहीं किया जाता, तब तक वे पार्टी से बाहर ही रहेंगे।

उन्होंने जमुआ प्रखंड सचिव से मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम और संगठन के भीतर पनप रही गुटबाजी पर तत्काल आम सभा बुलाई जाए और कार्यकर्ताओं के मनमुटाव को दूर करने के लिए ठोस निर्णय लिया जाए।
सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज
एक तरफ रामकुमार वर्मा का निष्कासन और फिर ऊपरी कमिटी द्वारा लोकल कमिटी को ही भंग कर देना, और दूसरी तरफ वीरेंद्र वर्मा जैसे कद्दावर साथी का इस्तीफा—इन घटनाओं ने जमुआ में भाकपा माले के वोट बैंक और कैडर बेस पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि जिला और प्रदेश नेतृत्व इस कलह को कैसे शांत करता है या आने वाले दिनों में इस्तीफों की यह झड़ी और लंबी होती है।




