Last Updated on September 7, 2026 by Gopi Krishna Verma
FIR दर्ज हो या न हो, पर्ची मिलना तय हो

गिरिडीह। झारखंड के थानों में अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले आम नागरिकों को अब आवेदन जमा करने के लिए न मिन्नतें करनी पड़ेंगी और न ही चक्कर काटने होंगे। सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर पूरे झारखंड के थानों में ‘अनिवार्य आवेदन पंजीकरण एवं तत्काल रसीद व्यवस्था’ लागू करने की जोरदार मांग उठाई है।
संगठन के महासचिव शंकर पांडेय ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या जिले का सवाल नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के अधिकार और पुलिस-प्रशासन में पारदर्शिता से जुड़ा बेहद गंभीर मुद्दा है।

सिविल सोसाइटी की 4 सूत्रीय प्रमुख मांगें:
- 1. तत्काल एंट्री: थाने में आवेदन मिलते ही उसे उसी वक्त ‘आवेदन पंजी’ (Application Register) में दर्ज किया जाए।
- 2. यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर: प्रत्येक आवेदन को एक विशिष्ट पंजीयन संख्या (Unique Registration Number) दी जाए।
- 3. तारीख सहित पक्की रसीद: आवेदक को रजिस्ट्रेशन नंबर और तारीख अंकित ‘प्राप्ति रसीद’ (Acknowledgment Slip) तुरंत थमाई जाए, जिससे वह अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सके।
- 4. FIR न होने का बहाना नहीं चलेगा: FIR दर्ज हो या न हो, आवेदन की रसीद देने से मना नहीं किया जा सकता। सिविल सोसाइटी ने साफ किया कि आवेदन का रजिस्ट्रेशन और FIR दर्ज करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
आज के दौर में जब नागरिक साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य समस्याओं को लेकर थानों में पहुंचते हैं, तो अक्सर उन्हें आवेदन की प्राप्ति (acknowledgment) लेने के लिए ही पापड़ बेलने पड़ते हैं। आवेदन जमा हुआ या नहीं, उस पर क्या कार्रवाई हुई—यह अनिश्चितता फरियादी को मानसिक रूप से परेशान करती है।
“यह एक छोटी-सी प्रशासनिक व्यवस्था है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होगा। जब नागरिक को पक्की रसीद मिलेगी, तो पुलिस और जनता के बीच का विश्वास मजबूत होगा और थाने के अनावश्यक चक्करों से मुक्ति मिलेगी।” — शंकर पांडेय, महासचिव (सिविल सोसाइटी गिरिडीह)
सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
सिविल सोसाइटी ने भरोसा जताया है कि DGP झारखंड इस जनहितकारी सुझाव पर तुरंत संज्ञान लेंगे। यदि यह व्यवस्था पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू होती है, तो इससे न सिर्फ पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि थानों की कार्यशैली में भी बड़ा सुधारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।




