रजिस्टर्ड डाक सेवा समाप्ति एवं स्पीड पोस्ट में विलय पर पुनर्विचार की मांग तेज, सुनील खंडेलवाल ने संचार मंत्री को भेजा पत्र

Last Updated on March 6, 2026 by Gopi Krishna Verma गिरिडीह। देश में लगभग डेढ़ सौ वर्षों से प्रचलित पारंपरिक रजिस्टर्ड डाक सेवा को समाप्त कर उसे स्पीड पोस्ट सेवा में विलय किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठने लगी है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने इस संबंध में…

Last Updated on March 6, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। देश में लगभग डेढ़ सौ वर्षों से प्रचलित पारंपरिक रजिस्टर्ड डाक सेवा को समाप्त कर उसे स्पीड पोस्ट सेवा में विलय किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठने लगी है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने इस संबंध में भारत सरकार के Ministry of Communications के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए इसे जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

उन्होंने कहा कि रजिस्टर्ड डाक सेवा लंबे समय तक आम नागरिकों के लिए एक विश्वसनीय, सुरक्षित और किफायती माध्यम रही है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, मध्यमवर्गीय परिवारों, सामाजिक संगठनों तथा Right to Information Act, 2005 के अंतर्गत आवेदन करने वाले नागरिकों के लिए यह सेवा अत्यंत उपयोगी थी, क्योंकि महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रमाणिक तरीके से कम लागत में भेजने की सुविधा उपलब्ध रहती थी।

खंडेलवाल ने बताया कि पहले रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजने पर लगभग ₹ 26/- का खर्च आता था, जबकि वर्तमान में उसी प्रकार के पत्र को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजने पर ₹55–70 या उससे अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इस प्रकार शुल्क में हुई यह वृद्धि सामान्य नागरिकों, विशेषकर सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई आवेदकों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल सिद्ध हो रही है।उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह महत्वपूर्ण निर्णय बिना व्यापक जनपरामर्श या सार्वजनिक चर्चा के लागू किया गया है, जिससे आम जनता में असंतोष की भावना उत्पन्न हुई है। डाक सेवाओं में इस प्रकार के बड़े संरचनात्मक परिवर्तन से पहले व्यापक जन-जागरूकता एवं सुझाव प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।

प्रेषित शिकायत में मांग की गई है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक रजिस्टर्ड डाक सेवा को पूर्ववत पुनः प्रारंभ करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही इस विषय पर आवश्यक होने पर सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया भी अपनाई जाए, ताकि आम नागरिकों की राय को महत्व दिया जा सके।

खंडेलवाल ने कहा कि डाक सेवा देश के सामाजिक, प्रशासनिक एवं कानूनी ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए सरकार को चाहिए कि आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।

मामले में आवश्यक कार्रवाई करने हेतु खंडेलवाल के पत्र को B. M. Patel (Director MOC PG) Room No.605, Mahanagar Doorsanchar Bhawan, New Delhi के पास भेज दिया गया है।

व्यापक जनहित में खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि इस अति संवेदनशील एवं व्यापक जनहित के विषय पर सरकार के द्वारा जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।

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Pappu Kumar Verma

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Gopi Krishna verma

Gopikrishna Verma serves as the Editor of the ‘Dahad India’ news portal. Furthermore, he possesses over fifteen years of experience in the field of journalism. In addition to his work with this news portal, he currently serves as a correspondent for the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. He began his career in journalism with the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. His writing on serious subjects—such as public issues, law, education, and the environment—is remarkable, unique, and inspiring. His dedication to the field of education is such that he himself serves as the Director and Science Mentor at an educational institution, the ‘Adarsh Institute of Education’.

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