गिरिडीह के अरगाघाट पुल की जर्जर स्थिति पर अविलंब कार्रवाई की मांग ने पकड़ा जोर

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Last Updated on April 30, 2026 by Gopi Krishna Verma

सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने झारखंड सरकार को भेजा पत्र

गिरिडीह। शहर के सिरसिया, पांडेयडीह, महेशमुंडा, जामताड़ा एवं गिरिडीह-मधुपुर मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला अरगाघाट पुल आज अत्यंत जर्जर एवं खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। यह पुल न केवल हजारों लोगों के दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन है, बल्कि क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जीवनरेखा भी है।

वर्तमान में पुल की हालत चिंताजनक है, पुल के किनारों की रेलिंग पूरी तरह टूट चुकी है, सड़क की सतह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है तथा संरचनात्मक कमजोरी साफ दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण है और जन सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ भी।यदि समय रहते इस ओर ठोस एवं त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन की होगी।

उपरोक्त के संबंध में शहर के सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने झारखंड सरकार से पुल की अविलंब मरम्मती एवं जिर्णोद्धार हेतु एक पत्र भेजा है। खंडेलवाल ने अपने पत्र में सरकार से मांग की है कि पुल का अविलंब तकनीकी निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए तत्काल अस्थायी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, पुल की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर निश्चित समय-सीमा घोषित की जाए एवं इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

खंडेलवाल के पत्र पर आवश्यक कार्रवाई करने हेतु इसे मो. आसिफ हसन, संयुक्त सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग झारखंड सरकार के पास भेज दिया गया है।

व्यापक जनहित से जुड़े इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर प्रशासन से शीघ्र एवं प्रभावी हस्तक्षेप की अपेक्षा है, ताकि संभावित बड़े हादसे को टाला जा सके और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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