Last Updated on September 9, 2026 by Gopi Krishna Verma
गिरिडीह के बगोदर के जरमुन्ने पूर्वी पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी के खिलाफ लगाए गए कथित कमीशन का आरोप

गिरिडीह। जरमुन्ने पूर्वी पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी के खिलाफ लगाए गए कथित कमीशन के आरोपों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बगोदर थाना कांड संख्या 248/2025 से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मुखिया के कामकाज की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), हजारीबाग से कराने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में धर्मदेव राणा उर्फ बबलू राणा की ओर से दायर क्रिमिनल अपील संख्या 608/2026 पर हुई। निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत के आदेश के मुताबिक, संबंधित प्राथमिकी जरमुन्ने पूर्वी पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी की ओर से दर्ज कराई गई है। इसमें एक ठेकेदार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया है। दूसरी ओर, ठेकेदार की ओर से आरोप लगाया गया है कि मुखिया बिना कमीशन लिए भुगतान की राशि रिलीज नहीं करती हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया यह सार्वजनिक पद के कथित दुरुपयोग का मामला प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर किसी वास्तविक शिकायत को दबाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एसपी, ACB हजारीबाग को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। साथ ही ACB को जरमुन्ने पूर्वी पंचायत की मुखिया के कामकाज की जांच कर सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया गया है।

अब इस मामले पर सबकी नजरें 12 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत ने फिलहाल 15 जुलाई 2026 को पारित अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया है।
हालांकि, कमीशन मांगने और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि ACB की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।




