Last Updated on September 11, 2026 by Gopi Krishna Verma
जमुआ प्रखंड के चिलगा पंचायत अंतर्गत गम्हरिया के हैं मृतक

नवडीहा। आजीविका कमाने की चाह में अपने घर-परिवार से दूर गए झारखंड के एक और प्रवासी मजदूर की परदेस में असमय जान चली गई। गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत चिलगा पंचायत (गम्हरिया गांव) के 39 वर्षीय अनुज प्रसाद सिंह का गुजरात के सूरत में अचानक निधन हो गया।
अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद सहयोगियों ने उन्हें तुरंत पास के क्लीनिक में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही गम्हरिया गाँव पहुंची, मृतक के परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया।
प्रवासी मजदूरों की नियति: सामाजिक संस्थाएं ही सहारा
झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और दावों से इतर, परदेस में संकट के समय एक बार फिर स्थानीय राज्य के प्रवासी मजदूर और सामाजिक संगठन ही मददगार बने। घटना की जानकारी मिलते ही ‘समस्त झारखंड समाज सेवा ट्रस्ट’ की टीम तुरंत हरकत में आई।
ट्रस्ट के सदस्यों ने सूरत प्रशासन से समन्वय बनाकर कागजी प्रक्रियाओं को पूरा कराया और शव को परिजनों तक पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस/परिवहन की व्यवस्था की। इस सेवा कार्य में रामाशीष ठाकुर, वनिल विश्वकर्मा, बासुदेव महतो और महादेव वर्मा समेत कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया।
सिस्टम पर फिर उठे गंभीर सवाल
सूरत में गिरिडीह और झारखंड के मजदूरों की असामयिक मृत्यु का यह पहला मामला नहीं है। अक्सर बीमारी या दुर्घटना के समय मजदूरों के पास न तो कोई सामाजिक सुरक्षा होती है और न ही राज्य सरकार की कोई सीधी मदद तुरंत पहुँच पाती है।
चिलगा पंचायत की स्थानीय मुखिया सीमा कुमारी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को प्रवासी मजदूरों के लिए एक ठोस और त्वरित सहायता तंत्र (Support Mechanism) बनाना चाहिए।
गाँव में पसरा मातम
संभावना जताई जा रही है कि अनुज प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गम्हरिया पहुँचेगा, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दुखद घटना ने एक बार फिर झारखंड में रोजगार के अवसरों की कमी और प्रवासी मजदूरों की उपेक्षा की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।




