बीजेपी स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, फर्जी आंदोलन से जनता को बरगलाने का प्रयास: राजेश सिन्हा

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Last Updated on November 3, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। भाकपा-माले गिरिडीह नगर सचिव राजेश सिन्हा ने प्रेस बयान जारी कर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और फर्जी आंदोलनों के जरिए उपचुनाव में जनता को बरगलाने की कोशिश कर रही है।

राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि बीजेपी देश के मुख्य मुद्दों पर पूरी तरह खामोश है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, कत्लखानों से जुड़े इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 250 करोड़ रुपये का चंदा लेने, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती स्थिति पर बीजेपी नेता चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है।

सीमा सुरक्षा और मजदूर नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सेना को बॉर्डर से पीछे हटाकर चीन के पक्ष में सीमा खाली कराई गई। अस्पतालों में फैली अव्यवस्था और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज फैक्ट्रियों में ठेका मजदूर 12-12 घंटे काम करने को मजबूर हैं और देश भर में करीब एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए हैं, लेकिन इन मुद्दों पर बीजेपी की ओर से कोई आवाज नहीं उठती।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पक्ष में पूरी बीजेपी खड़ी नजर आती है। चुनाव आयोग के दो सहयोगियों द्वारा उनके खिलाफ 10 आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई न होना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानून से यह स्पष्ट हो चुका है कि देश को किस स्तर तक प्रभावित किया जा रहा है।

आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली में पुलिस के जरिए लाठीचार्ज करवाना, युवाओं (जेन-जी) पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में डालना, राम मंदिर में हुई चोरी के मामले पर खामोशी साधना और जन आंदोलनों को दबाने के लिए सैकड़ों ट्रेनें व मेट्रो सेवाएं रद्द करना सरकार की कार्यशैली को दर्शाता है। मीडिया पर नियंत्रण का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से सरकार के खिलाफ वाली खबरों व पोस्ट को हटवाया जा रहा है।

चुनाव प्रक्रियाओं पर हमला बोलते हुए माले नेता ने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर करना, SIR के नाम पर 13 करोड़ लोगों के नाम काटना, बंगाल में EVM जलाना, मतगणना के समय केंद्र सरकार के कर्मियों से काम लेना और जनता को महीनों बंधक बनाकर रखना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में 66 लाख वोट काटने के बाद चुनाव के बाद 32 लाख वोट दोबारा जोड़ दिए गए।

उन्होंने अंत में कहा कि आंदोलन स्थलों पर जैमर लगवाना और स्थान बदलना इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार डरी हुई है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा किए गए सैकड़ों वादों पर काम न करना जनता के साथ घोर अन्याय है।

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