गिरिडीह डीसी रामनिवास यादव का सख्त रुख: जनता दरबार में सुनी समस्याएं, एक सप्ताह के भीतर लंबित मामलों के निष्पादन का अल्टीमेटम

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Last Updated on November 3, 2026 by Gopi Krishna Verma

“जनशिकायतों के निष्पादन में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” — रामनिवास यादव, उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, गिरिडीह

गिरिडीह। आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान तथा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाए हैं। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव ने आज अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में जनता दरबार का आयोजन किया, जिसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने पहुंचकर अपनी समस्याएं और शिकायतें रखीं।

खाद्य आपूर्ति, भूमि विवाद और पेंशन से जुड़े आए मामले

जनता दरबार के दौरान खाद्य आपूर्ति, कल्याण विभाग, भूमि विवाद, शिक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य और विद्युत आपूर्ति से जुड़े विभिन्न व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक हित के मामले सामने आए। उपायुक्त ने एक-एक कर सभी फरियादियों की शिकायतों को बेहद गंभीरता से सुना और संबंधित मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

अधिकारियों को दो-टूक निर्देश: केवल औपचारिकता नहीं, दें परिणामोन्मुख नतीजे

उपायुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे शिकायतों पर केवल कागजी और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहें। प्रत्येक मामले की गहराई से जांच कर नियमानुसार ठोस और परिणामोन्मुख (Result-oriented) कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब या लापरवाही बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी।

पोर्टल पर लंबित मामलों पर विशेष नजर, एक सप्ताह की डेडलाइन

जन समाधान पोर्टल पर लंबित मामलों को लेकर डीसी ने विशेष रूप से नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों को पोर्टल पर लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा करने और एक सप्ताह के भीतर उनका शत-प्रतिशत निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।

इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • गुणवत्ता और पारदर्शिता: शिकायतों के निष्पादन की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
  • आपसी समन्वय: जिन मामलों में स्थलीय जांच या अन्य विभागों से समन्वय की जरूरत है, वहां आपसी तालमेल बिठाकर त्वरित कार्रवाई हो।
  • फरियादियों को फीडबैक: प्रत्येक शिकायत के निष्पादन के बाद आवेदकों को की गई कार्रवाई से अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए।

उपायुक्त ने कहा कि जनता दरबार प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनशिकायतों की केवल सुनवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से धरातल पर हल करना है।

इस अवसर पर सहायक समाहर्ता यश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अंजना भारती सहित कई अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।

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