गिरिडीह में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-2 की समीक्षा: नवंबर तक सभी गांवों को ‘मॉडल ग्राम’ बनाने का लक्ष्य
Last Updated on November 3, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-2 के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने को लेकर परिसदन सभागार में एक महत्वपूर्ण जिला-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मिशन निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) रंजीता हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
ऑनलाइन प्रविष्टि और जियो-टैगिंग पर जोर
बैठक के दौरान मिशन निदेशक ने निर्देश दिया कि पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से बनाई गई स्वच्छता संबंधी संरचनाओं की ऑनलाइन प्रविष्टि और जियो-टैगिंग का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मिशन के तहत तैयार की जाने वाली सभी स्वच्छता संरचनाएं पूरी तरह क्रियाशील रहनी चाहिए और उनका नियमित रखरखाव भी होना चाहिए।

नवंबर तक शत-प्रतिशत गांवों को ‘मॉडल ग्राम’ बनाने का निर्देश
प्रशासन ने आगामी नवंबर माह तक जिले के शत-प्रतिशत गांवों को ‘मॉडल ग्राम’ के रूप में विकसित और घोषित करने के लिए कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, ग्राम स्तर पर स्वच्छता को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार, दीवार लेखन (वाल पेंटिंग) और चित्रांकन कराने पर विशेष बल दिया गया।
वित्तीय प्रगति और विभिन्न घटकों की समीक्षा
बैठक में उपलब्ध राशि और उसके व्यय की भी समीक्षा की गई, जिसमें शेष राशि का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुसार समयबद्ध तरीके से करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा, सभी सहायक और कनीय अभियंताओं को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।
समीक्षा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख घटकों की प्रगति का जायजा लिया गया:
- व्यक्तिगत घरेलू शौचालय
- गोवर्धन योजना
- प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई
- ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM)

प्रशासनिक प्रयास और अधिकारियों की उपस्थिति
उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने मिशन निदेशक को अवगत कराया कि गिरिडीह जिले में मनरेगा और पंचायती राज विभाग के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण लगातार किया जा रहा है।
बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सभी सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, प्रखंड समन्वयक, यूनिसेफ के सहयोगी, क्षेत्रीय परामर्शी और अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे।
