Last Updated on October 5, 2026 by Gopi Krishna Verma
“कागज़ों पर टावर खड़े करना काफ़ी नहीं, मोबाइल में सिग्नल आना ज़रूरी” — सुनील खंडेलवाल; उपभोक्ताओं के पलायन को रोकने के लिए स्वतंत्र जाँच व जवाबदेही तय करने का आग्रह

गिरिडीह। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख दूरसंचार कंपनी BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) की लगातार गिरती नेटवर्क गुणवत्ता, बार-बार कॉल ड्रॉप और इंटरनेट की धीमी गति को लेकर सामाजिक एवं सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने गंभीर चिंता जताई है। BSNL से उपभोक्ताओं के तेज़ी से हो रहे पोर्ट-आउट (पलायन) को रोकने और सेवाओं में त्वरित सुधार लाने के उद्देश्य से उन्होंने संचार मंत्रालय एवं दूरसंचार विभाग (DoT), नई दिल्ली के सक्षम प्राधिकारी को एक विस्तृत पत्र भेजकर 10 सूत्रीय मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
अपने पत्र में खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि BSNL देश के ग्रामीण, पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में संचार की मुख्य जीवनरेखा रही है। ऐसे में इसकी सेवाओं में आ रही गिरावट को केवल एक सामान्य उपभोक्ता समस्या मानकर नज़रअंदाज़ करना देश की सार्वजनिक संचार व्यवस्था के साथ खिलवाड़ होगा।
“सवाल केवल नेटवर्क का नहीं, BSNL के भविष्य और भरोसे का है”
सुनील खंडेलवाल ने कहा कि BSNL को केवल एक व्यावसायिक संस्था के रूप में देखकर उसके लाभ-हानि का आकलन करना उचित नहीं है। इसने उन क्षेत्रों तक नेटवर्क पहुँचाया है जहाँ निजी कंपनियाँ जाने से कतराती हैं।
“यदि सरकारी पुनरुद्धार योजनाओं और अरबों रुपये की सहायता के बावजूद ज़मीनी स्तर पर उपभोक्ता को गुणवत्तापूर्ण सेवा नहीं मिल रही है, तो योजनाओं के क्रियान्वयन, संसाधनों के उपयोग और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही की स्वतंत्र समीक्षा होना अत्यंत आवश्यक है।” — सुनील कुमार खंडेलवाल, सामाजिक एवं RTI कार्यकर्ता
BSNL सुधार के लिए संचार मंत्रालय से की गई 10 प्रमुख मांगें:
- स्वतंत्र जाँच: विभिन्न क्षेत्रों में नेटवर्क कवरेज, कॉल ड्रॉप, सिग्नल स्ट्रेंथ और इंटरनेट स्पीड की निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
- क्षेत्रवार सुधार योजना: खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों की सूची तैयार कर समयबद्ध (Time-bound) सुधार लागू किया जाए।
- 4G/5G व टावरों की समीक्षा: 4G/5G विस्तार, खराब टावरों और पुराने उपकरणों की स्थिति की नियमित निगरानी हो।
- शिकायत निवारण प्रणाली: उपभोक्ता शिकायतों के समाधान की समय-सीमा, गुणवत्ता और वास्तविक परिणामों की ट्रैकिंग की जाए।
- पोर्ट-आउट सर्वे: ग्राहक BSNL की सेवाएँ क्यों छोड़ रहे हैं, इसका निष्पक्ष व स्वतंत्र सर्वेक्षण कराया जाए।
- दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता: ग्रामीण, सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क विस्तार व मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए।
- अधिकारियों की जवाबदेही: कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता व प्रशासनिक जवाबदेही तय हो।
- फंड्स का पारदर्शी मूल्यांकन: BSNL को दी गई सरकारी पुनरुद्धार निधि (Revival Package) के उपयोग और उसके वास्तविक परिणामों का ऑडिट हो।
- विशेष अभियान: खोए हुए उपभोक्ता विश्वास को वापस पाने के लिए विशेष “BSNL सेवा सुधार अभियान” की शुरुआत की जाए।
- पारदर्शी फीडबैक: शिकायतकर्ता को केवल औपचारिक आश्वासन न देकर, की गई कार्रवाई का स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध कराया जाए।

कागज़ी दावों से हटकर ज़मीनी परिणामों की आवश्यकता
खंडेलवाल ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी दूरसंचार व्यवस्था का असली पैमाना कागज़ों पर जारी योजनाएँ या टावरों की संख्या नहीं, बल्कि उपभोक्ता के मोबाइल में आने वाला सिग्नल है। यदि किसी ज़रूरी फोन कॉल के दौरान बार-बार कॉल कटती है या इंटरनेट काम नहीं करता, तो योजनाओं का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
उन्होंने अंत में कहा कि अब केवल आश्वासनों का समय बीत चुका है, ज़मीन पर दिखने वाले ठोस परिणामों की ज़रूरत है। यदि समय रहते BSNL के तकनीकी आधुनिकीकरण और प्रशासनिक जवाबदेही पर कदम उठाए गए, तो इसे पुनः एक विश्वसनीय, आधुनिक और उपभोक्ता-केंद्रित संस्था के रूप में स्थापित किया जा सकता है।




