Last Updated on July 13, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने एवं पशुपालन को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला गव्य विकास कार्यालय, गिरिडीह द्वारा संचालित योजनाएं निरंतर सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। इन्हीं प्रयासों का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रखंड बेंगाबाद के ग्राम पतरोडीह निवासी श्री प्रदम कुमार दास हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ प्राप्त कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाया, बल्कि क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिला गव्य विकास कार्यालय, गिरिडीह के माध्यम से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना अंतर्गत श्री प्रदम कुमार दास को 10 दुधारू गायों का लाभ प्रदान किया गया। योजना से जुड़ने से पूर्व उनके पास केवल दो गाय थीं तथा आय के सीमित स्रोत होने के कारण परिवार का भरण-पोषण चुनौतीपूर्ण था।

योजना के माध्यम से प्राप्त सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन तथा स्वयं की मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया। वर्तमान में उनके पास लगभग 15 गाय एवं भैंस हैं, जिनमें जर्सी एवं साहीवाल नस्ल की गायें तथा मुर्राह नस्ल की भैंसें शामिल हैं।आज उनके डेयरी फार्म से प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध का संग्रहण एवं विपणन वे झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) के माध्यम से करते हैं तथा स्थानीय बाजार में भी दूध की आपूर्ति कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। पशुओं के संतुलित पोषण एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने खेत में हरे चारे की खेती भी विकसित की है, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालन की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
डेयरी व्यवसाय को आधुनिक एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से श्री प्रदम कुमार दास ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), सिलीगुड़ी से डेयरी विकास का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण से अर्जित तकनीकी ज्ञान को व्यवहार में उतारते हुए उन्होंने अपने डेयरी फार्म का सफल संचालन किया और उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की। उनकी कार्यकुशलता, अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता को देखते हुए झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) द्वारा उन्हें पतरोडीह बल्क मिल्क कूलर (BMC) के संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वर्तमान में इस दुग्ध संग्रहण केंद्र से लगभग 30 पशुपालक किसान जुड़े हुए हैं तथा यहां प्रतिदिन लगभग 1000 लीटर दूध का संग्रहण कर देवघर डेयरी भेजा जाता है। इससे क्षेत्र के पशुपालकों को दूध विपणन की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।श्री प्रदम कुमार दास अपने अनुभव एवं सफलता के आधार पर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा सहकारी दुग्ध व्यवसाय से जुड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से अनेक पशुपालक नियमित रूप से डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उनकी सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी प्रशिक्षण तथा लाभुक की मेहनत और समर्पण के समन्वित प्रयासों से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। गव्य विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएं जिले में पशुपालन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।




