झारखंड उच्च न्यायालय में भारी संख्या में रिक्त न्यायाधीश पदों के कारण न्याय व्यवस्था बाधित, अविलंब नियुक्ति की मांग

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Last Updated on March 23, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 25 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से वर्तमान में कई पद रिक्त पड़े हुए हैं। इन रिक्तियों के कारण न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इस संबंध में शहर के सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने Department of Justice नई दिल्ली को पत्र भेज कर झारखंड उच्च न्यायालय में रिक्त पदों पर अविलंब नियुक्ति हेतु निवेदन किया है। खंडेलवाल ने अपने पत्र में कहा है कि न्याय में विलंब, न्याय से वंचित होने के समान है। ऐसे में न्यायपालिका में पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति न होना, न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सीधा प्रश्न खड़ा करता है। लाखों वादकारियों की आशाएं न्यायालय से जुड़ी होती हैं, लेकिन न्यायाधीशों की कमी के कारण मामलों का निष्पादन अत्यधिक धीमी गति से हो रहा है।

पत्र में आगे कहा गया है कि है कि झारखंड उच्च न्यायालय में रिक्त न्यायाधीशों के पदों पर अविलंब नियुक्ति की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि लंबित मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित हो सके और आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।

यह कदम न केवल न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि “सभी को सुलभ और शीघ्र न्याय” के संवैधानिक लक्ष्य को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खंडेलवाल के पत्र पर आवश्यक कार्रवाई करने हेतु इसे नारायण प्रसाद (निदेशक), नियुक्ति प्रभाग, Department of Justice, Jaisalmer House, New Delhi के पास भेज दिया गया है। व्यापक जनहित में खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां कर ली जाएगी।

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