गिरिडीह स्टेडियम के पुनरुद्धार की मांग तेज, युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला

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Last Updated on March 1, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। गिरिडीह का लगभग चालीस वर्ष पूर्व निर्मित ऐतिहासिक स्टेडियम आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। कभी खेल प्रतिभाओं की जन्मस्थली रहा यह स्टेडियम वर्तमान में आधारभूत सुविधाओं के अभाव, टूटी दर्शक दीर्घाओं, असमतल मैदान, खराब प्रकाश व्यवस्था एवं अपर्याप्त सुरक्षा प्रबंध के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है।

सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने इस गंभीर विषय को जनहित में उठाते हुए सरकार से स्टेडियम के शीघ्र पुनरुद्धार की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक भवन का प्रश्न नहीं, बल्कि गिरिडीह के हजारों युवाओं के भविष्य, खेल संस्कृति और क्षेत्रीय विकास का विषय है।

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खंडेलवाल ने अपने पत्र में कहा है कि स्टेडियम से अतीत में अनेक खिलाड़ियों ने जिला एवं राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। किंतु वर्तमान दुर्दशा के कारण युवा खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता का अवसर नहीं मिल पा रहा है। यदि समय रहते ठोस पहल नहीं की गई, तो क्षेत्र की खेल संभावनाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी।

प्रस्तावित पुनरुद्धार कार्यों में शामिल हैं

  • मुख्य मैदान का समतलीकरण एवं आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली।
  • दर्शक दीर्घाओं की मरम्मत एवं नई बैठने की व्यवस्था आधुनिक फ्लडलाइट एवं साउंड सिस्टम।
  • खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम, शौचालय एवं पेयजल सुविधा।
  • सुरक्षा मानकों के अनुरूप चारदीवारी एवं प्रवेश द्वार का सुदृढ़ीकरण।
  • हरित क्षेत्र विकास एवं सौंदर्यीकरण।

यह मांग संबंधित विभाग को औपचारिक रूप से प्रेषित कर दी गई है और मामला वर्तमान में मो.आसिफ हसन, संयुक्त सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार के संज्ञान में है।

खंडेलवाल ने सरकार से आग्रह किया है कि इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति के पुनरुद्धार हेतु आवश्यक वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर कार्य प्रारंभ कराया जाए।गिरिडीह के युवाओं का भविष्य इंतज़ार नहीं कर सकता अब निर्णय का समय है।

व्यापक जनहित में खंडेलवाल ने आशा व्यक्त की है कि सरकार के द्वारा जल्द ही स्टेडियम के पुनरुद्धार हेतु आवश्यक कार्रवाई कर ली जाएगी।

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