सरकार से सीधा संवाद हुआ खत्म ! ‘जन संवाद केंद्र’ बंद होने से बढ़ी जनता की परेशानी
Last Updated on March 29, 2026 by Gopi Krishna Verma
जन संवाद बंद, जनता परेशान: झारखंड में शिकायतों का रास्ता हुआ ठप

गिरिडीह। राज्य में वर्षों से बंद पड़े मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र को पुनः प्रारंभ करने हेतु शहर के जाने-माने सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर निवेदन किया है। खंडेलवाल ने अपने पत्र में निवेदन किया है कि कुछ वर्ष पूर्व झारखंड राज्य में संचालित “मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र” आम जनता एवं शासन के बीच एक अत्यंत प्रभावी एवं सशक्त माध्यम के रूप में कार्य कर रहा था।

इस केंद्र के माध्यम से नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के लोगों की छोटी-बड़ी समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित हो पाता था। यह केंद्र न केवल शिकायत निवारण का माध्यम था, बल्कि जनता और शासन के बीच विश्वास एवं जवाबदेही की एक सुदृढ़ कड़ी भी स्थापित करता था। किंतु विगत कुछ वर्षों से इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के बंद हो जाने के कारण आमजन, विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के लोग, अपनी समस्याओं के समाधान हेतु भटकने को विवश हैं।
आज स्थिति यह है कि आम नागरिकों का सीधा संवाद माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से स्थापित नहीं हो पा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति असंतोष एवं निराशा की भावना बढ़ रही है। यह स्थिति सुशासन एवं जनकल्याण की भावना के अनुरूप नहीं है।पत्र में आगे निवेदन किया गया है कि जनहित एवं सुशासन को सुदृढ़ करने हेतु “मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र” को पुनः शीघ्र प्रारंभ किया जाय ताकि आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके, ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को न्यायसंगत मंच प्राप्त हो पाए, शासन एवं जनता के बीच सीधा, पारदर्शी एवं उत्तरदायी संवाद स्थापित हो सके। यह कदम निश्चित रूप से राज्य में सुशासन, पारदर्शिता एवं जनविश्वास को पुनः सुदृढ़ करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

खंडेलवाल ने इस अति गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर यथाशीघ्र सकारात्मक पहल करने एवं आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि जनहित के इस अति गंभीर मुद्दे पर माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा जल्द ही आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाएंगे। पत्र पर अग्रतर कार्रवाई करने हेतु इसे मोहम्मद आसिफ हसन, संयुक्त सचिव, कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग झारखंड सरकार रांची को अग्रसारित कर दिया गया है।

