दूरदर्शन पर “जानने का हक” कार्यक्रम पुनः प्रारंभ करने की मांग

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Last Updated on April 20, 2026 by Gopi Krishna Verma


सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली को भेजा पत्र

गिरिडीह। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 देश के नागरिकों को शासन-प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक साधन प्रदान करता है। इसके बावजूद आज भी समाज के बड़े वर्ग को इस अधिकार के उपयोग की जानकारी नहीं है, जिसके कारण वे अपने “जानने के अधिकार” का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
पूर्व में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला “जानने का हक” कार्यक्रम सूचना के अधिकार के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाता था। इस कार्यक्रम के माध्यम से आम नागरिकों को आरटीआई की प्रक्रिया, उसके लाभ तथा वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से जागरूक किया जाता था। किंतु दुर्भाग्यवश इस उपयोगी कार्यक्रम का प्रसारण बंद कर दिया गया है।

परिणामस्वरूप, सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून का लाभ सीमित लोगों तक ही सिमट कर रह गया है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

इस संबंध में सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री भारत सरकार, नई दिल्ली को पत्र भेजकर दूरदर्शन पर “जानने का हक” कार्यक्रम को पुनः शीघ्र प्रारंभ करने के संबंध में निवेदन किया है जिसमें कहा गया है कि इस कार्यक्रम को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक एवं जन-सुलभ बनाया जाए, जिसमें वास्तविक उदाहरणों, विशेषज्ञों की राय तथा सफल आरटीआई मामलों को शामिल किया जाए।

कार्यक्रम का प्रसारण ऐसे समय पर किया जाए जब अधिकतम दर्शक इसे देख सकें, तथा क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसका विस्तार किया जाए। इस विषय पर एक राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक भी सूचना का अधिकार प्रभावी रूप से पहुँचे।

खंडेलवाल ने अपने पत्र में आगे कहा है कि यह केवल एक कार्यक्रम पुनः प्रारंभ करने का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से जोड़ने का प्रश्न है। यदि इस दिशा में शीघ्र एवं ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पारदर्शिता एवं जवाबदेही के सिद्धांत मात्र कागजों तक सीमित रह जाएंगे।

इस पत्र पर अग्रतर कार्रवाई हेतु इसे मीनू बत्रा, संयुक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण विभाग, नई दिल्ली के पास अग्रसारित कर दिया गया है।

खंडेलवाल ने भरोसा जताया है कि जनहित के इस अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषय पर त्वरित एवं सकारात्मक कार्रवाई जल्द ही सुनिश्चित की जाएगी।

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