जमुआ: सोतराबाद आदिवासी गांव में शिक्षा की अलख, यदुवंशी परिवार की पहल से खिले बच्चों के चेहरे
Last Updated on November 1, 2026 by Gopi Krishna Verma
‘शिक्षा ही बदलाव का सशक्त माध्यम’—जिला परिषद सदस्य संजय हाजरा; बच्चों के बीच बांटी गई कॉपियां, पेन और पेंसिले

नवडीहा। प्रखंड के पिछड़े और ग्रामीण अंचल तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल देखने को मिली है। जमुआ के सोतराबाद आदिवासी गांव में यदुवंशी परिवार, मंझलाडीह की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें दर्जनों आदिवासी बच्चों के बीच उत्साहपूर्वक शैक्षणिक सामग्रियों का वितरण किया गया। कॉपियां, पेन, पेंसिल और पेंसिलों के साथ-साथ खाने-पीने की चीजें पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।

नियमित विद्यालय जाने और पढ़ाई पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य संजय हाजरा ने बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि “शिक्षा ही समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम है।” इस दौरान बच्चों को नियमित रूप से स्कूल जाने और मन लगाकर अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के सामुदायिक प्रयास बच्चों का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करते हैं।

इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस प्रेरणादायक आयोजन को सफल बनाने में यदुवंशी परिवार के सदस्यों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका रही। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
- रामचंद्र प्रसाद यादव (यदुवंशी परिवार)
- धनेश्वर प्रसाद वर्मा (सांसद प्रतिनिधि, नवडीहा ओपी)
- रोहित सिंह (पंचायत समिति सदस्य)
- गुड़िया देवी (उपमुखिया)
- मुकेश वर्मा, दिनेश वर्मा, देवनारायण टुडू, रमेश सोरेन, प्रधान टुडू और सुनील सोरेन सहित कई ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजकों ने अंत में संकल्प दोहराया कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के सेवा कार्य निरंतर जारी रखे जाएंगे।
