Last Updated on October 12, 2026 by Gopi Krishna Verma
राज्य सूचना आयोग में सुनवाई ठप होने पर जताई चिंता; नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग

गिरिडीह। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के लागू होने की वर्षगांठ पर आज ‘RTI दिवस’ के अवसर पर सिविल सोसाइटी, गिरिडीह ने सुशासन, पारदर्शिता और जन-जवाबदेही को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। संस्था ने देश और राज्य के कई शीर्ष संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थानों में RTI आवेदन दाखिल कर जनहित से जुड़ी विस्तृत जानकारियां मांगी हैं।
इसके साथ ही, झारखंड राज्य सूचना आयोग (J SIC) में लंबित मामलों और मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त होने पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया है।
शीर्ष संवैधानिक संस्थानों में दाखिल किए गए RTI आवेदन
सिविल सोसाइटी द्वारा सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और आम नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए निम्नलिखित संस्थानों में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रेषित किए गए हैं:
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली
- माननीय झारखंड उच्च न्यायालय
- माननीय राज्यपाल, झारखंड
- माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार
- झारखंड राज्य सूचना आयोग
- मुख्य सचिव एवं कार्मिक विभाग के सचिव, झारखंड सरकार
“RTI केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी, शासन की पारदर्शिता और सत्ता को जवाबदेह बनाने का एक सशक्त लोकतांत्रिक औजार है।” — सिविल सोसाइटी, गिरिडीह
राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल
विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सूचना आयोग में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति होने के बावजूद द्वितीय अपीलों और शिकायतों की नियमित सुनवाई नहीं हो पा रही है। मुख्य सूचना आयुक्त का पद अब भी रिक्त बना हुआ है।

संस्था ने सवाल उठाया है कि जब आम नागरिकों और वंचित वर्ग को विभागों से जानकारी नहीं मिलती और वे न्याय की उम्मीद में आयोग का दरवाजा खटखटाते हैं, तो आयोग के प्रभावी संचालन के बिना उनके अधिकारों की रक्षा कैसे होगी? सुनवाई में हो रही इस देरी का सबसे अधिक नुकसान गरीब और योजनाओं में पारदर्शिता चाहने वाले नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पत्र: “अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत”
RTI दिवस के अवसर पर सिविल सोसाइटी के महासचिव शंकर पांडेय ने झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री बाबूलाल मरांडी को एक पत्र भेजा है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि पत्राचार और प्रेस वार्ताओं के बावजूद सरकार की ओर से मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति और आयोग को पूर्णतः सक्रिय करने को लेकर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। सिविल सोसाइटी ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे को केवल पत्राचार तक सीमित न रखकर अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करें और सरकार पर समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं।
RTI दिवस पर सरकार और जन-प्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश
सिविल सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि RTI नागरिकों को दिया गया कोई प्रशासनिक उपकार नहीं, बल्कि कानून द्वारा प्रदत्त वैधानिक अधिकार है। आयोग में अनिश्चितकालीन विलंब और सुनवाई न होना लोकतंत्र में पारदर्शिता के उद्देश्य को कमजोर करता है।
संस्था ने उम्मीद जताई है कि RTI दिवस पर उठाई गई यह पहल संबंधित संस्थानों, विभागों और जनप्रतिनिधियों को गंभीर ठोस कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करेगी। सिविल सोसाइटी ने संकल्प दोहराया कि वे सुशासन और जनहित के मुद्दों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।




