गिरिडीह के नवडीहा में लोन डिस्काउंट का झांसा देकर लाखों की ठगी: देवघर के संस्था से जुड़े तार

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Last Updated on September 3, 2026 by Gopi Krishna Verma

20 से अधिक लोगों ने नवडीहा ओपी में आवेदन देकर लगाया गुहार

गिरिडीह/नवडीहा। कम किस्त और लोन में भारी छूट का लालच देकर वाहन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। गिरिडीह जिले के नवडीहा ओपी (ओपी) क्षेत्र में राधास्वामी संगठन की तर्ज पर काम कर रही एसडीआर फाउंडेशन से जुड़ा यह पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जिसका मुख्य कार्यालय देवघर में बताया जा रहा है। मामले को लेकर तरौन गांव के शमीम अख्तर (पिता- मुस्लिम अंसारी) के खिलाफ 20 से अधिक ठगे गए ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से नवडीहा ओपी में आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

ठगी का हाईटेक पैटर्न: झांसा, यूपीआई ट्रांसफर और फर्जी एग्रीमेंट

पीड़ितों द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी शमीम अख्तर ने ग्रामीणों को अपने जाल में फंसाकर उनके नाम पर बाइक, कार और ट्रैक्टर जैसे वाहन फाइनेंस करवाए।

  • पैसे ऐंठने का तरीका: वाहन फाइनेंस होते ही लोन की राशि लाभुकों के हाथों से तथा उनके मोबाइल यूपीआई के जरिए सीधे अपने पास ट्रांसफर करवा ली।
  • भरोसा जीतने का पैंतरा: आरोपी ने वाहनों की डिलीवरी और चाबी तो लाभुकों को दिला दी, लेकिन वादा किया कि पूरी ईएमआई (किस्त) वह स्वयं भरेगा। ग्रामीणों का विश्वास जीतने के लिए उसने शुरुआत की 2-4 किस्तों के पैसे खुद लाभुकों के खातों में यूपीआई के जरिए भेजे।
  • फर्जी दस्तावेज का सहारा: जब लोगों ने पक्के कागजात मांगे, तो कंपनी के फर्जी दस्तखत और मुहर लगा हुआ एक सादे कागज का एग्रीमेंट थमा दिया, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

फाइनेंसरों के एजेंट भी मिले, अब बैंक से आ रहे रिकवरी कॉल

शुरुआती किस्तों के बाद जब आरोपी ने पैसे भेजना बंद कर दिया, तब फाइनेंस कंपनियों और बैंकों से ईएमआई भुगतान के लिए नोटिस और रिकवरी कॉल आने शुरू हुए। तब जाकर ग्रामीणों को अपने साथ हुए इस बड़े फ्रॉड का अहसास हुआ।

सूत्रों के मुताबिक, इस ठगी के सिंडिकेट में कुछ फाइनेंस कंपनियों के एजेंट भी शामिल थे। आरोपी ने शोरूम आने-जाने वाले सीधे-साधे ग्राहकों को लुभाने के लिए इन एजेंटों को अपने साथ जोड़ रखा था, जो डिस्काउंट का लालच देकर लोगों को इस जाल में धकेलते थे।

पैसे मांगने पर धमकी, आरोपी बोला- ‘जो करना है कर लो’

पीड़ितों का आरोप है कि जब वे अपने पैसे मांगने या ईएमआई भरवाने के लिए शमीम के पास जाते हैं, तो वह बात करने से कतराता है। पहले उसने भरोसा दिलाते हुए कहा था कि “किस्त न भरने पर मेरा खेत जोत लेना”, लेकिन अब वह सीधे धमकी दे रहा है कि “जो करना है करो, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा।”

इतना ही नहीं, आरोपी ने ग्रामीणों के खिलाफ ही उलटा थाने में आवेदन दे दिया है। वर्तमान में शसीम अंसारी, सब्नू अंसारी, आलम अंसारी, तस्लीम अंसारी, पवन कुमार वर्मा, अजय कुमार, मनीष कुमार और सकराउल अंसारी समेत 20 से अधिक ग्रामीणों ने पुलिस से सख्त कानूनी कार्रवाई और पैसे वापस दिलाने की मांग की है।

मामले पर पक्ष:

आरोपी शमीम अंसारी: “मैंने भी थाने में आवेदन दिया है। इस विषय पर मुझे फिलहाल कुछ नहीं कहना है।”

रवि कुमार (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसडीआर फाउंडेशन): “पिछले छह महीनों से संस्था को डोनेशन नहीं मिला है, जिसके कारण ईएमआई का भुगतान अटका हुआ है। विभिन्न दानदाताओं से संपर्क किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही फंड मिलेगा और 5 सितंबर से लाभुकों को ईएमआई की राशि मिलने लगेगी। सभी लाभुक धैर्य बनाए रखें।”

नवडीहा पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों के आवेदनों की जांच कर रही है और फर्जी एग्रीमेंट व वित्तीय लेनदेन के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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