जिले में पोषण पखवाड़ा शुरू, 23 अप्रैल तक आयोजित होंगे कार्यक्रम

Last Updated on April 10, 2026 by Gopi Krishna Verma गिरिडीह। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव के द्वारा जानकारी दी गई कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 09.04.2026 से 23.04.2026 तक “पोषण पखवाड़ा” आयोजन किया जाना है। इस वर्ष मनाये जाने वाले पोषण पखवाड़ा के मुख्य थीम “बचपन के पहले 6 साल-पोषण,…

Last Updated on April 10, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव के द्वारा जानकारी दी गई कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 09.04.2026 से 23.04.2026 तक “पोषण पखवाड़ा” आयोजन किया जाना है। इस वर्ष मनाये जाने वाले पोषण पखवाड़ा के मुख्य थीम “बचपन के पहले 6 साल-पोषण, पढ़ाई के लिए बेमिसाल” के अंतर्गत sub theme निम्नवत् है-

i. Mother & Child Nuitrition मातृत्व एवं शिशू पोषण।

ii. Early Stimulation for Brain Development (0-3 Years) मस्तिष्क के विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन (0-3 वर्ष)।

iii. Play Based Education in Early Years (3-6 Years) आधारित शिक्षा (3-6 वर्ष)। प्रारंभिक वर्षों में खेल

iv. Role of Parents and and Community in Minimizing Screen Time – स्क्रीन टाइम को कम करने में माता-पिता और समुदाय की भूमिका।

v. Garnering Community Support for Stronger Anganwadis आंगनबाड़ियों के लिए सामुदायिक समर्थन जुटाना।आगे उपायुक्त ने बताया कि मिशन पोषण 2.0 का उद्देश्य सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पोषण स्तर में सुधार लाना है। यह मिशन समुदायों को मजबूत करने एवं लाभार्थियों को सशक्त बनाने में जोर देता है। विगत वर्षों में सफल पोषण पखवाड़ो के आयोजन तथा जन-जागरूकता एवं सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से पोषण के परिणामों में सुधार पाया गया है। इस वर्ष पोषण पखवाड़ा 9 से 23 अप्रैल 2026 तक मनाया जाएगा, जिसमें पोषण से संबंधित सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू करना तथा सामुदायिक गतिविधियों को सुनिश्चित किया जाना है।

पोषण पखवाड़ा 2026 के प्रमुख थीम की विवरणी निम्नवत् है-

1. मातृ एवं शिशु पोषण:- गर्भावस्था शिशु के मस्तिष्क विकास और दीर्घकालिक संज्ञानात्मक क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान मातृ पोषण और प्रसवपूर्व देखभाल प्रमुख भूमिका निभाते हैं। गर्भवती महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने से समय पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में गदद मिलती है। साथ ही, जीवन के पहले 1000 दिनों में शिशु और छोटे बच्चों के उचित आहार और पोषण संबंधी व्यवहार को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक विकास को सुदृढ किया जा सकता है।

2. प्रारंभिक मस्तिष्क विकास (0-3 वर्ष):- जीवन के पहले छह वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इस अवधि में बच्चे का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है। स्नेह, देखभाल, पोषण और बच्चों के साथ नियमित सहभागिता उनके सोचने, बोलने और शारीरिक क्षमताओं में सुधार करती है और सीखने की मजबूत नीव तैयार करती है। अभिभावक और देखभालकर्ता घर पर सरल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के मस्तिष्क विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाते है। बच्चों से बात करना, गीत गाना, खेलना और उनके क्रियाओं का उत्तर देना मस्तिष्क के कनेक्शन मजबूत करने में मदद करता है।

3. खेल-आधारित शिक्षा (3-6 वर्ष):- प्रारंभिक बाल्यावस्था में खेल सीखने का मुख्य माध्यम है। खेल, गतिविधियों और बच्चों के अनुकूल अनुभव उनकी सीखने की क्षमता बढ़ाते हैं। इसलिए, बच्चों के संपूर्ण विकास और कक्षा-1 की तैयारी के लिए खेल आधारित गतिविधि-आधारित और प्रश्नोत्तरी-आधारित शिक्षण अपनाना आवश्यक है। यह 3-6 वर्ष के बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक, भाषा और सांस्कृतिक विकास का समर्थन करता है।

4. स्क्रीन समय कम करने में अभिभावक और समुदाय की भूमिकाअत्यधिक स्क्रीन उपयोग और बैठने की जीवनशैली प्रारंभिक मस्तिष्क विकास के लिए हानिकारक हो सकती है। अभिभावक और समुदाय बच्चों में स्क्रीन समय को सीमित करके सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा दे सकते है।

5. मजबूत आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए समुदाय का समर्थनआंगनबाड़ी केंद्र प्रारंभिक बाल देखभाल, पोषण और समुदाय आधारित सेवाओं का आधार है। इनकी प्रभावी सेवाएँ केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं हैं। इसके लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी पहल (CSR) के तहत सहयोग आवश्यक है।

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Gopi Krishna verma

Gopikrishna Verma serves as the Editor of the ‘Dahad India’ news portal. Furthermore, he possesses over fifteen years of experience in the field of journalism. In addition to his work with this news portal, he currently serves as a correspondent for the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. He began his career in journalism with the Hindi edition of the ‘Hindustan Times’. His writing on serious subjects—such as public issues, law, education, and the environment—is remarkable, unique, and inspiring. His dedication to the field of education is such that he himself serves as the Director and Science Mentor at an educational institution, the ‘Adarsh Institute of Education’.

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