सिद्धो-कान्हू केवल नाम नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक हैं: रॉकी सिंह
Last Updated on April 11, 2026 by Gopi Krishna Verma
गिरिडीह में झामुमो ने मनाई अमर शहीद सिद्धो-कान्हू की जयंती

गिरिडीह। शनिवार को गिरिडीह झामुमो जिला कार्यालय में हूल क्रांति के महानायक अमर शहीद सिद्धो-कान्हू की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता झामुमो गिरिडीह के नगर अध्यक्ष राकेश सिंह रॉकी ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ महान स्वतंत्रता सेनानियों के छाया चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया।

नगर अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि “सिद्धो-कान्हू केवल नाम नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक हैं। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और शोषण के खिलाफ जो बिगुल फूंका था, वहीं हौसला आज भी झामुमो के हर कार्यकर्ता की प्रेरणा है। हमें उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचाने का संकल्प लेना होगा। कोलेश्वर सोरेन ने कहा कि हूल क्रांति भारतीय स्वाधीनता संग्राम का वह अध्याय है जिसने अंग्रेजों की जड़ें हिला दी थीं। सिद्धो-कान्हू का बलिदान हमें सिखाता है कि अपनी अस्मिता और हक के लिए कभी झुकना नहीं चाहिए। आज की पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास से सीखने की जरूरत है।

मौके पर कार्यक्रम में अभय सिंह, दिलीप रजक, मो० जाकिर, अनवर अंसारी, राकेश रंजन, अनुभव सिंह, वकील चौड़े, संजय वर्मा, तेजो मंडल सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद सिहोडीह निवासी प्रमोद स्वर्णकार, मोहन स्वर्णकार और विनोद स्वर्णकार ने झामुमो के नीति सिद्धांतों को मानते हुए झामुमो की सदस्यता ग्रहण की।
