क्षतिग्रस्त तिरंगा फहराना राष्ट्र का अपमान, सुनील खंडेलवाल की कड़ी आपत्ति पर रेल प्रशासन हरकत में
Last Updated on February 20, 2026 by Gopi Krishna Verma

गिरिडीह। पुराने गिरिडीह रेलवे स्टेशन पर क्षतिग्रस्त अवस्था में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के मामले को गंभीर राष्ट्रसम्मान का प्रश्न बताते हुए सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद रेल प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।

दिनांक 15 फरवरी 2026 को स्टेशन परिसर में फहराया जा रहा तिरंगा स्पष्ट रूप से क्षतिग्रस्त पाया गया। इस पर श्री खंडेलवाल ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल को कड़े शब्दों में पत्र प्रेषित किया। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया कि क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय ध्वज को फहराना न केवल नियमों के प्रतिकूल है, बल्कि यह विधि-विरुद्ध कृत्य की श्रेणी में आता है।उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पूर्व में रेल प्रशासन द्वारा स्वयं यह जानकारी दी गई थी कि राष्ट्रीय ध्वज के दो सेट सुरक्षित रखे जाते हैं, ताकि एक ध्वज के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में तुरंत दूसरे सेट को लगाया जा सके। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त ध्वज का फहराया जाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

श्री खंडेलवाल की कड़ी आपत्ति और हस्तक्षेप के बाद वरिष्ठ मंडल अभियंता–2, आसनसोल मंडल द्वारा त्वरित संज्ञान लिया गया। पत्रांक WM/R/CPGRM दिनांक 17 फरवरी 2026 के माध्यम से सूचित किया गया कि क्षतिग्रस्त ध्वज को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है तथा उसके स्थान पर नया राष्ट्रीय ध्वज विधिवत फहरा दिया गया है।

इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्रध्वज केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि देश की अस्मिता, बलिदान और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से समझौता होता है तो वे इसे गंभीरता से उठाएंगे और आवश्यक विधिक कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे।
साथ ही उन्होंने रेल प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो तथा राष्ट्रीय ध्वज संहिता का कठोरता से पालन किया जाए।
